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________________ निमित्तशास्त्रम् ४७ इन्द्रधनुषप्रकरण रत्तिम्मिय इंदधणुजइदीसं एसोय सुक्किलभं। सो कुणइरत्थभंग रणस्सवीरोय पीडंच ॥१०१॥ अर्थ : रात्रि के समय में यदि श्वेत इन्द्रधनुष दिखाई देवे तो वहाँ पर संग्राम में स्थभंग होंगे व मनुष्यों को कष्ट होगा। दिवहेदीसइधणुओ पुव्वेणय दक्खिणेण वामेण। सोकुणइणीरणासंवायं च व मुंचय बहुयं।।१०२॥ अर्थ : यदि दिन के समय में इन्द्रधनुष पूर्व से दक्षिण की ओर वक्र मालुम होवे तो खूब हवा चलेगी परन्तु पानी नहीं बरसेगा। पच्छिमभाये पुणओवरिसंचविमंचएअइ बहुयं। उत्तर उइवोअहवादीसंतिण सोहणाधण्णू॥१०३॥ अर्थ : यदि इन्द्रधनुष पूर्व से पश्चिम की ओर टेडा दिखाई दे तो पानी बहुत बरसेगा । यदि धनुष पूर्व से उत्तर की दिशा में टेढ़ा दिखाई , पडे तो शुभ नहीं है। धणियंणइएविना कण्णा कुवंतिमंडलंणिउी साहंति अग्गिदाहंचोरभयंचणिवेदत्ति॥१०४|| * अर्थ : यदि इन्द्रधनुष मण्डलाकार ज्ञात होते तो अग्जि व चोर का भय* अवश्य बतावेगा।
SR No.090300
Book TitleDavvnimittam
Original Sutra AuthorRushiputra Maharaj
AuthorSuvidhisagar Maharaj
PublisherBharatkumar Indarchand Papdiwal
Publication Year2003
Total Pages133
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size3 MB
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