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________________ आधा करने से ४ राजू होते हैं । इस ४ राजू को पद अर्थात् ऊँचाई ७ राजू से गुणा करने पर ४ x ७ = २८ वर्ग राजू अधोलोक का क्षेत्रफल होता है। इस क्षेत्रफल का दक्षिणोत्तर विस्तार ७ राजू से गुणा करने पर २८ x ७ = १६६ घन राजू अधोलोक का घनफल होता है। ५. प्रश्न : ऊर्ध्वलोक का क्षेत्रफल और घनफल क्या है ? उत्तर : अर्ध ऊलोक का मुख ५ राज. भूमि ५ राज़ दोनों को जोड़कर आधा करने से ३ राजू होते हैं। इस ३ राजू को पद अर्थात् ऊँचाई-३, राजू से गुणा करने पर ३४३ = २१ वर्ग राजू अर्थ ऊर्ध्वलोक का क्षेत्रफल होता है। इस क्षेत्रफल को दक्षिणोत्तर विस्तार ७ राजू से गुणा करने पर ३४ ७ = १३ घन राजू अर्ध ऊर्श्वलोक का घनफल होता है। क्षेत्रफल और घनफल को दूना करने से २१ x २ = ४२ वर्ग राजू और १६० x २ =१४७ घन राजू क्रमशः पूरे ऊर्ध्वलोक का क्षेत्रफल और घनफल होता है। ६. प्रश्न : लोक की रचना किस प्रकार की है ? उत्तर : अधोलोक, मध्यलोक और ऊर्ध्वलोक के भेद से लोक के तीन भेद हैं। मेरु पर्वत के नीचे ७ राजू प्रमाण अधोलोक है। मेरु
SR No.090247
Book TitleKarananuyoga Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages147
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
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