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________________ २२३. प्रश्न : उद्वेलना, किन प्राकृतियों की होती है ? . उत्तर : आहारक शरीर, आहारक शरीरांगोपांग, सम्यक्त्व प्रकृति, सम्यङ् मिध्यात्व प्रकृति, देवगति, देवगत्यानुपूर्वी, नरकगति, नरकगत्यानुपूर्वी, वैक्रियिक शरीरांगोपांग मनुष्यगति, मनुष्यगत्यानुपूर्वी और उच्च गोत्र, इन तेरह प्रकृतियों की : उद्धेलना होती है। उद्वेलना होने पर इनका सत्त्व नहीं रहता। २२४. प्रश्न : उद्वेलित प्रकृति पुनः सत्ता में आती है या नहीं ? उत्तर : आती है, जैसे अनादि मिथ्या दृष्टि मध्य लीव के मेहमीद . की २६ प्रकृतियों की सत्ता है वह उपशम सम्यग्दर्शन प्राप्त कर मिथ्यात्व प्रकृति के मिथ्यात्व, सम्यमिथ्यात्व . और सम्यक्त्वरूप तीन खण्ड कर २८ प्रकृतियों की सत्ता वाला हुआ पश्चात् मिथ्यादृष्टि होकर पल्योपम के असंख्यातवें भाग में सम्यमिथ्यात्व और सम्यक्त्व प्रकृति में से एक । की अथवा दोनों की उद्वेलना कर २७ और २६ प्रकृति की सत्ता वाला हुआ। पश्चात् पुनः सम्यग्दर्शन प्राप्त कर मिथ्यात्व प्रकृति के ३ खण्ड करने से सम्यमिध्यात्व और सम्यक्त्व प्रकृति की सत्ता को प्राप्त कर लेता है।
SR No.090246
Book TitleKarananuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages125
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size1 MB
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