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________________ १९७. प्रश्न : नवम् गुणस्थान में व्युच्छिन्न होने वाली ६ प्रकृतियाँ कौन है ? उत्तर : नपुंसकवेद, स्त्रीवेद, पुरुषवेद, संज्वलन क्रोध-मान और माया इन छह प्रकृतियों की उदय-व्युच्छित्ति नवम् गुणस्थान में होती है। १६... समन्द : वशम् गुणस्तान में युक्मिन्न होने वाली १ प्रकृति कौन है ? उत्तर : संज्वलन लोभ, इस एक प्रकृति की उदय व्युच्छित्ति दशम् गुणस्थान में होती है। १६६. प्रश्न : एकादश गुणस्थान में व्युच्छिन्न होने वाली २ प्रकृतियाँ कौन है ? उत्तर : वज्रनाराच और नाराच संहनन, इन दो प्रकृतियों की उदय ___ व्युच्छित्ति ग्यारहवें गुणस्थान में होती है। २००. प्रश्न : द्वादश गुणस्थान में व्युच्छिन्न होने वाली १६ प्रकृतियाँ कौन हैं ? उत्तर : निद्रा और प्रचला इन दो की उपान्त्य समय में तथा ५ ज्ञानावरण ५ अन्तराय और चार दर्शनावरण इन १४ की दोनों मिलाकर १६ प्रकृतियों की उदय व्युच्छित्ति बारहवें गुणस्थान में होती है। (७४)
SR No.090246
Book TitleKarananuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages125
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size1 MB
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