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________________ ४६. प्रश्न : ३ प्रकार की आकार योनियों का स्वरूप क्या है ? उत्तर :शंखावर्त योनि : इस योनि का आकार शंखा के आवर्त समान होता है। इस योनि ताली स्त्री के गर्म नहीं रहता है! कूर्मोन्नत योनि : इस योनि का आकार कुछए की पीठ की तरह उन्नत होता है। इस योनि वाली स्त्री के तीर्थकर, चकवर्ती, नारायण, बलभद्र तथा साधारण मनुष्य भी उत्पन्न होते हैं। वंशपत्र योनि : इस योनि का आकार वंशपत्र के समान लम्बा होता है। इस योनि वाली स्त्री के साधारण मनुष्य ही उत्पन्न होते हैं। ४७. प्रश्न : ६ प्रकार की गुणयोनियों का स्वरूप क्या है ? उत्तर : सचित्त : आत्मप्रदेशों से युक्त पुद्गल पिण्ड को सचित्त योनि कहते हैं। अचित्त : आत्मप्रदेशों से रहित पुद्गलपिण्ड को अचित्त योनि कहते हैं। सचित्ताचित्त : जन्म के आधारभूत स्थान के कुछ पुद्गल सचित्त और कुछ पुद्गल अचित्त हों, उन को सचित्ताचित्त योनि कहते हैं। (२७)
SR No.090245
Book TitleKarananuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages149
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
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