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________________ ३०६ सप्ततिका प्रकरण में २५, २४ २३ और २२ प्रकृतिक, ये चार सत्तास्थान है। इस प्रकार यहाँ कुल १७ सत्तास्थान होते हैं । C प्रमत्त विरत गुणस्थान में प्रकृतिक बंधस्थान तथा ४, ५, ६ और ७ प्रकृतिक, ये चार उदयस्थान हैं। इनमें से ४ प्रकृतिक उदयस्थान में २८, २४ और २१ प्रकृतिक, ये तीन सत्तास्थान होते हैं । ५ और ६ प्रकृतिक उदयस्थानों में से प्रत्येक में २५, २४, २३. २२ और २१ प्रकृ तिक ये पांच-पांच सत्तास्थान हैं तथा ७ प्रकृतिक उदयस्थान में २८, २४, २३ और २२ प्रकृतिक, ये चार सत्तास्थान हैं। इस प्रकार यहाँ कुल १७ सत्तास्थान होते हैं । अप्रमत्तसंयत गुणस्थान में पूर्वोक्त प्रमत्तसंयत गुणस्थान की तरह १७ सत्तास्थान जानना चाहिये । अपूर्वकरण गुणस्थान में & प्रकृतिक बंधस्थान और ४, ५ तथा ६ प्रकृतिक उदयस्थान तथा इन तीन उदवस्थानों में से प्रत्येक में २५, २४ और २१ प्रकृतिक ये तीन-तीन सत्तास्थान होते हैं। इस प्रकार यहाँ कुल ६ सत्तास्थान होते हैं । ५ अनिवृत्तिबादर गुणस्थान में ५, ४, ३, २ और १ प्रकृतिक, ये पाँच बंधस्थान तथा २ और १ प्रकृतिक, ये दो उदयस्थान हैं। इनमें से प्र प्रकृतिक बंधस्थान और २ प्रकृतिक उदवस्थान के रहते हुए २८, २४, २१, १३, १२ और ११ प्रकृतिक, ये छह सत्तास्थान होते हैं । ४ प्रकृतिक बंस्थान और १ प्रकृतिक उदयस्थान के रहते २८, २४, २१. ११, और ४ प्रकृतिक, ये छह सत्तास्थान हैं । ३ प्रकृतिक बंधस्थान और प्रकृतिक उदयस्थान के रहते २८, २४, २१, ४ और ३ प्रकृतिक, ये पांच सत्तास्थान हैं । २ प्रकृतिक बंधस्थान और १ प्रकृतिक उदयस्थान के रहते २५, २४, २१, ३ और २ प्रकृतिक, ये पांच सत्तास्थान होते हैं और १ प्रकृतिक बंधस्थान व १ प्रकृतिक उदयस्थान के रहते हुए २८ २४,
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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