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________________ ३६३ गाथा ५२ ३६१-३:७० इन्द्रिय मार्गणा में नामकर्म के बंधादिस्थान एकेन्द्रिय मार्गणा में संवेध भंगों का विचार एकेन्द्रिय मार्गणा में संवेध भंगों का दर्शक विवरण विकलत्रयों में संवैध भंगों का विचार ३६४ बिकलत्रयों में संवेध भंगों का दर्शक विवरण पंचेन्द्रियों में संवैध भंगों का विचार २६६ पंचेन्द्रियों में संवेध भंगों का दर्शक विवरण ३७०-३७५ बंधादि स्थानों की आठ अनुयोगद्वारों में कथन करने की सूचना ३७० मार्गणाओं में ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, आयु, गोत्र और अन्तराय कर्म के बंधादि स्थानों का दर्शक विवरण ३७३ मार्गणाओं में मोहनीयकम के बन्ध, उदय, सत्ता स्थानों व उनके संवेध भंगों का दर्शक विवरण ३७५ मार्गणाओं के नाम कर्म के बंध, उदय, सत्ता स्थानों और उनके संवेध भंगों का दर्शक विवरण ३७५ गाथा ५४ ३७५-१७८ उदय उदीरणा में विशेषता का निर्देश गाथा ५५ ३७८-६१ ४१ प्रकृतियों के नामों का निर्देश, जिनके उदय और उदीरणा में विशेषता है ३७८ गाथा ५६ ३८१-३८३ गुणस्थानों में प्रकृतियों के बंध के निर्देश की सूचना ३८१ मिथ्यात्व और सासादन गुणस्थान की बंधयोग्य प्रकृतियाँ और कारण ३८२ ३७६
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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