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________________ ( ३५ ) गाथा ४८ ३०३-३०७ गुणस्थानों में मोहनीयकर्म के सत्तास्थान गुणस्थानों में मोहनीयकर्म के बंधादि स्थानों के संबंध भंगों का विजार गाया ४६, ५० ३०७-३४७ गुणस्थानों में नामकर्म के बंधादि स्थान का विचार मिथ्यात्व गुणस्थान में नामकर्म के बंधादि स्थान व संवेध मंगों का विचार मिथ्यात्व गुणस्थान में नामकर्म के संवेध भंगों का दर्शक विवरण ३१६ सासादन गुणस्थान में नामकर्म के बंधादि स्थान व संवेध भंगों का विचार सासादन गुणस्थान में नामकर्म के संवेध भंगों का दर्शक विवरण मिश्र गुणस्थान में नामकर्म के बंधादि स्थानों व संवेध भंगों का विचार ३२७ मिश्र गुणस्थान में नामकर्म के संवेध भंगों का दर्शक विवरण ३२८ अविरति सम्यग्दृष्टि गुणस्थान में नामकर्म के बंधादि स्थानों व संवेध भंगों का विचार ३२८ अविरति सम्यग्दृष्टि गुणस्थान में संवेध भंगों का दर्शक देशविरति गुणस्थान में नामकर्म के बंधादि स्थानों व संवेध भंगों का विचार देशविरति गुणस्थान में संवेध मंगों का दर्शक विवरण प्रमत्तबिरत गुणस्थान में नामकर्म के बंधादि स्थानों और संवेध भंगों का विधार. ३३६
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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