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________________ २८० सप्ततिका प्रकरण चौबीसी, पाँच प्रकृतिक उदयस्थान में नौ चौबीसी, चार प्रकृतिक उदयस्थान में तीन चौबीसी होती हैं तथा दो प्रकृतिक उदयस्थान के बारह भंग एवं एक प्रकृतिक उदस्थान के पांच भंग हैं। इनका विशेष विवेचन नीचे किया जाता है। ___ दस प्रकृतिक उदयस्थान एक है अतः उसमें भंगों की एक चौबीसी कही है । यह उदयस्थान मिथ्यात्व गुणस्थान में पाया जाता है । नौ प्रकृतिक उदयस्थान में भंगों की छह चौबीसी होती हैं क्योंकि यह उदयस्थान मिथ्यात्व, सासादन, मिश्र और अविरत सम्यग्दृष्टि इन मार गुणस्थानों में पाया जाता है और प्रियात्व गुणस्थान में प्रकृतिविकल्प तीन होने से तीन प्रकार से होता है, अत: वहाँ भंगों की तीन चौबीसी और शेष तीन गुणस्थानों में प्रकृतिविकल्प न होने से प्रत्येक में भंगों की एक चौबीसी होती है। आठ प्रकृतिक उदयस्थान में भंगों की ग्यारह चौबीसी होती हैं । यह आठ प्रकृतिक उदयस्थान पहले से सेकर पांचवें गुणस्थान तक होता है और मिथ्यात्व व अविरत सम्यग्दृष्टि गुणस्थानों में प्रकृतियों के सीन-तीन विकल्पों से तथा सासादन व मिश्र में दो-दो विकल्पों से बनता है और देशविरत गुणस्थान में प्रकृतियों का विकल्प नहीं है । अतः मिथ्यात्व और अविरत में तीन-तीन, सासादन और मिश्र में दो-दो और देशविरत में एक, भंगों की चौबीसी होती है। इनका कुल जोड़ ३+३+२+२ +१=११ होता है । इसी प्रकार सात प्रकृतिक उदयस्थान में भी भंगों की ग्यारह चौबीसी हैं । यह उदयस्थान पहले से सातवें गुणस्थान तक पाया जाता है तथा चौथे और पांचवें गुणस्थान में प्रकृतियों के तीन-तीन विकल्प होने से तीन प्रकार से बनता है। अत: इन दो गुणस्थानों में से प्रत्येक में तीन-तीन और शेष पहले, दूसरे, तीसरे, छठे और सातवें, इन पांच गुणस्थानों में प्रकृतिविकल्प नहीं होने से अंगों की एक-एक चौबीसी होती है जिनका कुल जोड़ ग्यारह है।
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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