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________________ १८० गाभा २५ १५६-१५८ नामकर्म के प्रत्येक बंधस्थान के भंग १५६ नामकर्म के बन्धस्थानों के भंगों का दर्शक विवरण १५६ गाणा २६ नामकर्म के उदयस्थान नामकर्म के उदयस्थानों के स्वामी और उनके भंगों का निर्देश गाणा २७, २८ १७६-१८४ नामकर्म के उदयस्थानों के भंग उदयस्थानों के भंगों का दर्शक विवरण गाथा २६ १८४-१८७ नामकर्म के सत्तास्थान १८४ नामकर्म के सत्तास्थान और गो० कर्मकाण्ड का अभिमत १५६ गाथा ३० १८७-१८८ नामकर्म के बन्ध आदि स्थानों के संवेध कथन की प्रतिज्ञा १८८ गागा ३१, ३२ १५५-२०६ ओघ से नामकर्म के संवैध का विचार १६० नामकर्म के बंधादि स्थान व उनके भंगों का दर्शक विवरण २०५ गाथा ३३ २.६-२१० जीवस्थानों और गुणस्थानों में उत्तरप्रकृतियों के बंधादि स्थानों के भंगों का विचार प्रारम्भ करने की प्रतिज्ञा २१० गाथा ३४ २१०-२१३ जीवस्थान में ज्ञानावरण और अन्तरायकमं के बंधादि स्थानों के संवेध भंगों का विचार गाथा ३५ २१३--२२१ जोवस्थानों में दर्शनावरण कर्म के बंधादि स्थानों के संवेध भंगों का विचार २१३ २११
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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