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________________ EX सप्ततिका प्रकरण की अपेक्षा १२, तिथंच पंचेन्द्रियों की अपेक्षा ११५२ वैक्रिय तिर्यंच पंचेन्द्रियों की अपेक्षा १६, मनुष्यों की अपेक्षा ५७६, वैकिय मनुष्यों की अपेक्षा है, आहारक संयतों की अपेक्षा २, तीर्थंकर की अपेक्षा २, देवों की अपेक्षा १६ और नारकों की अपेक्षा ? भङ्ग है । इनका जोड़ १२+११५२+१६+५७६+९+१+१+१६+१-१७८५ होता है । अतः २६ प्रकृतिक उदयस्थान के कुल भङ्ग १७८५ प्राप्त होते हैं। ३० प्रकृतिक उदयस्थान में विकलेन्द्रियों की अपेक्षा १८ तिर्यंच पंचेन्द्रियों की अपेक्षा १७२८, बैकिय तिर्यच पंचेन्द्रियों की अपेक्षा ८, मनुष्यों की अपेक्षा ११५२, वैक्रिय मनुष्यों की अपेक्षा १, आहारक संयतों की अपेक्षा १, कलियों की अपेक्षा १ और देवों की अपेक्षा भङ्ग पूर्व में बतला आये हैं । इनका जोड़ १८+१७२८+६+११५२+ १+१+१+८=२६१७ होता है । अतः ३० प्रकृतिक उदयस्थान के २९१७ भङ्ग होते हैं । ३१ प्रकृतिक उदयस्थान में विकलेन्द्रियों की अपेक्षा १२, तियंच पंचेन्द्रियों की अपेक्षा ११५२, तीर्थंकर की अपेक्षा १ भङ्ग पूर्व में बतलाया है, और इनका कुल जोड़ ११६५ है, अतः ३१ प्रकृतिक उदयस्थान के ११६५ भङ्ग कहे हैं । ९. प्रकृतिक उदयस्थान का तीर्थंकर की अपेक्षा १ भंग होता है और ८ प्रकृतिक उदयस्थान का अतीर्थंकर की अपेक्षा १ भंग होता है। इन दोनों को पूर्व में बतलाया जा चुका है। अतः ९ प्रकृतिक और ८ प्रकृतिक उदयस्थान का १, १ भंग होता है । इस प्रकार २० प्रकृतिक आदि बारह उदयस्थानों के १+४२ + ११ +३३+६००+३३+१२०२+१७८५+२६१७ + ११६५+१+१= ७७९१ भंग होते हैं। नामकर्म के उदयस्थानों के भंग व अन्य विशेषताओं सम्बन्धी विवरण इस प्रकार समझना चाहिये
SR No.090244
Book TitleKarmagrantha Part 6
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages573
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size9 MB
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