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________________ d 4 गामा १५ औदारिकामध काययोग का चौथे, तेरहवें मुणस्थान का बन्धस्वामित्व कामैण कापयोग का बन्धस्वामित्व आहारक काययोग निक का बन्धस्वामित्व गाणा १६ १० ६२-६६ बैंकिय काययोग का बन्धस्वामित्व वैक्रियामय काययोग का बन्धस्वामित्व चमार्गणा का बन्दस्वामित अनन्तानुबन्धी कषायचतुष्क का बन्धस्वामित्व अप्रत्याख्यानावरण पायचतुष्क का इन्धस्वामित्व प्रत्यास्मानाबरण कषायचतष्क का बन्नस्वामित्व कापायमार्गणा का सामान्य बन्ध-स्वामित्व गाथा १७ संज्वलन कषायचतुष्क का बन्धस्वामित्व अविरत का अननस्वामित्व अज्ञानयिक का बलस्वामित्व वक्षदर्णन. अदर्शन का बन्धस्वामित्व খানাবিধ কা অনামিৰ प्र०७३-७४ मनःपर्याय ज्ञान का. बधस्वामित्व सामायिक, धोपस्थानीच धारिण का बन्धस्वाषिरत परिहार विशुद्धि संयम का बन्धस्वामिस्त्र कैवलशान बन का वन्धस्वामित्व ७४ मति, श्रुत व अधिद्धिक का बन्धस्वामित्व गाथा ११ पृ. ७ जपलम सम्यक्त्व का बन्धस्माभिस्वा.
SR No.090241
Book TitleKarmagrantha Part 3
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages267
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
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