SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 12
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ( १३ ) उपशांतमोह, क्षीणमोह, सयोगिकेवली बन्धयोग्य प्रकृति और कारण अयोगकेवली गुणस्थान गाथा १३ उदय व उदीरणा का लक्षण गुणस्थान में अबन्ध व उसका कारण में सामान्यतः उदययोग्य प्रकृतियों की संख्या व कारण मिथ्यात्वगुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ नामा १४ १५ १६, १७ मिथ्यात्वगुणस्थान में उदयविच्छिन्न प्रकृतियाँ सास्वादन गुणस्थान में उदयोग्य प्रकृतियों व कारण सास्वादन गुणस्थान में उदयविच्छिन्न प्रकृतियां मिश्र गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ माथा १५, १६ अविरत सम्यग्दृष्टि गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ देशविरत गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियों की संख्या व कारण देशविरत गुणस्थान में उदयविच्छिन्न प्रकृतियाँ प्रमत्तविरत व अप्रमत्तविरत गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ अपूर्वकरण गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ अनिवृत्तिकरण गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियां सूक्ष्मसंपराय गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ उपशांत मोह गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ मादा २० क्षीणमोह गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियाँ सयोगिकेवली गुणस्थान में उदययोग्य प्रकृतियां 06. 190 ७२-७३ ७३ ७४ ७५ ७६-७ ७७ ७८ ७ ८० ८१ ८२ ८२ ८५ ८७६० दद ८६ ६० ६० ६१-६३ *? ६२
SR No.090240
Book TitleKarmagrantha Part 2
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages251
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy