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________________ ( ७४ } अन्यकार को जीवनी समय-प्रस्तुत ग्रन्थकर्ता श्री देवेन्द्रसूरि का समम विक्रम की तेरहवीं शताब्दी का अन्त और चौदहवीं शताब्दी का प्रारम्भ काल है। उनका स्वर्गवास विक्रम संवत १३३७ में हुआ, ऐसा उल्लेख गुर्वावली (श्लोक १७४) में स्पष्ट है, परन्तु उनके जन्म, दीक्षा, मूरिपद आदि के समय का उल्लेख कहीं नहीं मिलता, तथापि यह जान पड़ता है कि १२२५ में श्री जगच्चन्द्रसूरि ने तपागच्छ की स्थापना की, तत्र वे दीक्षित हुए होंगे; गच्छ स्थापना के बाद श्री जगच्चन्द्रसूरि के द्वारा ही थी देवेन्द्रसूरि और श्री विजयचन्द्रसूरि को सूरिगद दिये जाने का वर्णन गुर्वावली के प्रलोक १०७ में है। यह तो मानना ही पड़ता है कि सूरिपद ग्रहण करने के समय श्री देवेन्द्रसूरि बय, विद्या और संयम से स्थविर होंगे; अन्यथा इतने गुरतर पद का और खासकर नवीन प्रतिष्ठित किये गये तपागच्छ के नायकत्व का भार वे कैसे सम्हाल सकते थे । वनका सुरिपद विक्रम संवत् १२८५ के बाद हुआ । सूरिषद के समय का अनुमान विक्रम संवत् १३०० मान लिया जाए, तव भी यह कहा जा सकता है कि तपागच्छ की स्थापना के समय वे नवदीक्षित होंगे 1 उनकी कुल उम्न पचास या वावन त्रषं की मान ली जाय तो यह सिद्ध है कि विक्रम सम्बत् १२७५ के लगभग उसका जन्म हुआ होगा । विक्रम सम्बन् १६०२ में उन्होंने उज्जयिनी में श्रेष्ठिवर जिनचन्द्र के पुत्र बीरधवल को दीक्षा दी, जो आगे विद्यानन्दसूरि के नाम से विख्यात हुए। उस समय देवेन्द्रसुरि की जन पच्चीस-सत्ताईस वर्ष की मान ली जाए. जब भी उक्त अनुमान- - १२७५ वि० सं० के लगभन जन्म होने की पुष्टि होती है । जन्म, दीक्षा तथा मूरिणव का समय निश्चित न होने पर भी इस बात में मन्देह नहीं कि वे विक्रम की तेरहवीं शताब्दी के अन्त में तथा चौदहवीं शताब्दी के प्रारम्भ में अपने अस्तित्व से 'भारतवर्ष की और खासकर गुजरात तया मालवा की शोभा बढ़ा रहे थे। जन्मभूमि, जाति आदि-श्री देवेन्द्रमूरि का जन्म मिस देश, किस जाति और किस परिवार में हुआ, इसका प्रमाण नहीं मिला। गुर्वावली में उनका जीवन वृत्तान्त है, परन्तु वह बहुत संक्षिप्त है। उसमें सूरिपद ग्रहण करने के बाद की बातों का उल्लेख है, अन्य बातों का नहीं । इसलिए उसके आधार पर
SR No.090239
Book TitleKarmagrantha Part 1
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages271
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
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