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कर्म प्रकृतिः
[ १८७
[ १८७ द्रव्यकर्मणामुपहा ]
एवं प्रकृतिस्थित्यनुभागप्रदेशविकल्पानि पौद्गलिकानि द्रव्यकर्माणि कथितानि ।
१८७. द्रव्यकमों के कथनका उपसंहार
इस प्रकार प्रकृति, स्थिति, अनुभाग तथा प्रदेशके भेदसे पीद्गलिक द्रव्य कर्म कहे ।