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________________ जीवसमास सिषय गाथा पृष्ठ संख्या ११७ १९९ २०२ २०४ २०५ २०५ भाग अन्तर-द्वार उपपात स्थान अन्तर या विरहकाल नरक एवं मनुष्य का अन्तरकाल अस एवं एकेन्द्रिय का अन्तरकाल वनस्पतिकाय का अन्तरकाल तिर्यञ्च एवं नपुंसक वेदादि का अन्तरकाल ईशानादि देवों का अन्तरकाल देवगति का विरहकाल मिथ्यात्व का विरह-अन्तरकाल सासादनाांदे का विरहकाल आहारक, वैक्रियमित्र की अन्तरकाल चारित्र का विरहकाल सम्यक्त्वादि का विरहकाल अजीव द्रव्य का विरहकाल २४४ २४७ २५० २५१ २५२ २५३ २५४ २५५ २५७ २५८ २६० २६१ २०७ २०७ २०८ २०२ २११ २१२ २१३ २६४ २१४ २६५ २७० २१६ २२१ भाव-द्वार जीव के भाव अजीव के भाव भाग ८ अल्पबहुत्व-द्वार चारगति में अल्पबहुत्व नरक एवं तिर्यत गति का अल्पबहुत्व देवगति में अल्पबहुत्व गुणस्थानों में अल्पबहुत्व अजीव द्रव्यों में अल्पबहुत्व उपसंहार २२३ २७१ २७३ २७४ २७७ २२४ २२५ २२६ २८२ २८६ २३२
SR No.090232
Book TitleJivsamas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagarmal Jain
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1998
Total Pages285
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size5 MB
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