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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org ज्ञानप्रदीपिका । वृषसिंहालिकुंभाश्च तिष्ठन्ति स्थिरराशयः । कर्किन तुलामेषाश्चरन्ति चरराशयः ॥ ३६ ॥ युग्मकन्याधनुर्मीनराशयो द्विस्वभावतः । Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ ये स्थिर राशियाँ हैं । कर्क, मकर, तुला और मेष ये चर राशियां हैं। मिथुन कन्या धनु और मीन ये द्विस्वभाव हैं । धनुषवनं प्रोक्तं कन्यका मिथुनं पुरे ॥३७॥ हरिर्गिरौ तुलामीनमकराः सलिलेषु च । धनु और मेष इनका स्थान वन है, कन्या और मिथुन का ग्राम, सिंह का पर्वत और तुला मीन और मकर का स्थान जल में है । नयां कुलीर: कुल्यायां वृषः कुंभः पयोघटे ||३८|| वृश्चिकः कूपसलिले राशीनां स्थितिरीरिता । वनकेदारकोद्यानकुल्याद्रिवनभूमयः ॥ ३६ ॥ आपगादिसरिद्वापि तटाकाः सरितस्तथा । कर्क का स्थान नदी में, वृष का कुल्या (क्षुद्रजलाशय ) में कुंभ का जल के घड़े में, वृश्चिक का स्थान कुएं के पानी में है - यही राशियों की स्थिति है १३ वन, क्यारी, बगीचा, कुल्या ( क्षद्रजलाशय ) पर्वत, वन, भूमि जलाशय या नदी, तड़ाग ( तालाव ) तथा नदियाँ - जलकुंभश्च कृपश्च नष्टद्रव्यादि सूचकौ ॥ ४० ॥ घटककन्या युग्मतुला ग्रामेऽजालिधनुर्हरिः । जल कुंभ, कूप, ये ऊपर के बताये अनुसार स्थान नष्ट वस्तु के सूचक हैं। कुंभ कन्या, मिथुन और तुला राशियाँ गाँव में वने चापि कुलिरोक्षनक्रमीना : जलस्थिताः ॥४१॥ विपिने शनिभौमार्कि भृगुचन्द्रौ जले स्थितौ । For Private and Personal Use Only मेष, वृश्चिक, धनु और सिंह वन में तथा, कर्क वृष, मकर और मीन ये जल में रहते हैं । इसी प्रकार शनि, भौम और सूर्य बन में, शुक और चंद्रमा जल में -
SR No.090186
Book TitleGyan Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamvyas Pandey
PublisherNirmalkumar Jain
Publication Year1934
Total Pages159
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size9 MB
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