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________________ पृष्ठ संख्या ८२ से ८२ से ८८ ८८ से १०९ ८८-८९ ८९ से १२ १२ से १०२ ४०९ १०२ १०३ ४९० १०३ १०४ से १०५ १०५ १०६ से १०७ १०७ से १०८ १०८ से १०१ विषय सूत्र संख्या दूसरा अवान्सर अधिकार ३०९ से ३३५ तत्-अतत् का निरूपण ३०९ से ३३५ तीसरा अवान्तर अधिकार ३३६ से ४३३ सत् नित्य-अनित्य उभय पर शंका व समाधान ३३६ से ३४० सत् और परिणाम के विषय में शंकाकार की अनेक आपत्तियाँ ३४१ से ३५८ समाधान व दृष्टान्ताभास ३५१ से ४०८ सत और परिणाम को सर्वथा नित्य मानने में दोष सिद्धान्त पक्ष का समर्थन साधक दृष्टान्त ४११ से ४१३ सत् नित्य-अनित्य विवक्षा सत् नित्य-अनित्य में शंका ४१८ से ४२१ उपरोक्त का समाधान ४२२ से ४२८ सर्वधा अनित्य एकान्त का खण्डन ४२९ से ४३२ नित्य-अनित्य की परस्पर सापेक्षता ४३३ चौथा वान्तर आशिकार एक अनेक का निरूपण ४३४ से ५०२ एक अनेक पर शंका ४३४ समाधान ४३५ सत् एक में युक्ति ४३६ से ४९२ अनेकपने में युक्ति ४९३ से ४९८ उभय अनुभय आदि शेष भंगों का समर्थन ४९९ एक अनेक आदि की परस्पर सापेक्षता ५०० सर्वथा निर्पेक्ष 'एक' का खण्डन सर्वथा निक्ष'अनेक' का खण्डन ५०२ एक अनेक अधिकार का सार दृष्टि परिज्ञान १ व २ सप्तभंगी विज्ञान प्रश्नोत्तर प्रथम रवण्ड/तृतीय पुस्तक नय, प्रमाण, निक्षेप निरूपण व प्रयोग पद्धति ५०३ से ७६८ प्रतिज्ञा ५०३ पहला अवान्तर अधिकार ५०४ से ५१५ नय का सामान्य निरूपण ५०४ से ५१५ दूसरा अवान्तर अधिकार ५१६ से ५५१ नय के मूल भेदों का कथन ५१६ से ५२० १०९ से १३२ १०१ १०९ से ११० ११० से १२३ १२३ से १२४ १२४ १२४ ५०१ १२५ १२४ से १२५ १२५ १२५ से १३२ १३२ से १३८ १३९ से २१६ १३१ से १४२ १३९ से १४२ १४२ से १५४ १४२ से १४३
SR No.090184
Book TitleGranthraj Shri Pacchadhyayi
Original Sutra AuthorAmrutchandracharya
Author
PublisherDigambar Jain Sahitya Prakashan Mandir
Publication Year
Total Pages559
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size18 MB
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