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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-७८३ नोट - 'छे' यह चिह्न पल्य के अर्धच्छेद का है। पल्य (६५५३६) की वर्गशलाका ४ है। इसके ८३ वर्गके अर्धच्छेद पल्यकी वर्गशलाकाके अर्धच्छेद (२) से २५६ गुणे हैं अत: २४२५६ । पल्यकी वर्गशलाकाके सातवें वर्गके अर्धच्छेद २४१२८ और पल्यकी वर्गशलाकाके छठे वर्गके अर्धच्छेद २४६४ हैं। इन तीनोंको जोड़नेपर २४४४८ योगफल होता है। इसीप्रकार पल्यकी वर्ग-शलाकाके ५वें वर्गके अर्धच्छेद २४३२, ४थे वर्गके अर्धच्छेद २४१६, तीसरे वर्ग के अर्धच्छेद २४८ हैं। यहाँ भी तीनों राशियों को जोड़ने से २४५६ योगफल हुआ। तथैव पल्य की वर्गशलाकाके द्वितीय वर्गके अर्धच्छेद २४४, प्रथमवर्गक अधेच्छेद २४२ और पल्य की वर्गशलाकाके अर्धच्छेद २४१ हैं। इन तीनोंको जोड़नेपर २४७ योगफल होता है। इसप्रकार उपर्युक्त कथनका यह आंभेप्राय है कि वर्गशलाका परीके अच्छेद की तीन-तीन राशियाँ परस्पर एक-दूसरे से आगे-आगे आठ-आठ गुणी होती जाती हैं। तत्थंतिमच्छिदिस्स य, अट्ठमभागो सलायछेदा हु। आदिमरासिपमाणं, दसकोडाकोडिपडिबद्धे ।।९३४ ॥ अर्थ - १० कोड़ाकोड़ीसागरकी स्थितिमें नानागुणहानिशलाकासम्बन्धी अन्तधन तो पल्यके अर्धच्छेदका आठवाँ भाग है और वर्गशलाकाके अर्धच्छेद आदिधन है। विशेषार्थ - उपर्युक्त सातपंक्तियोंमें से प्रथमपंक्तिमें तीनराशियों (पल्यके प्रथम, द्वितीय व तृतीयवर्गमूल) को जोड़नेपर जो लब्ध प. छे. - आया उन सभीको पृथक्-पृथक् फलराशि और सभीमें दसकोड़ाकोड़ीसागरको इच्छाराशि एवं ७० कोड़ा-कोड़ी-सागरको प्रमाणराशि मानना। इसप्रकार त्रैराशिककरके फलराशिको इच्छाराशिसे गुणाकर प्रमाणराशिका भाग देनेसे जो प्रमाण पृथक्-पृथक् प्राप्त हो उनको परस्परमें जोड़नेसे प.छ प्रमाण आवे वह दसकोड़ाकोड़ीसागर प्रमाण स्थिति-सम्बन्धी नानागुणहानिशलाका जानना । तद्यथा "अंतधणं गुणगुणियं आदिविहीणं रूउणुत्तरभजिय" इस सूत्रसे (पल्यके प्रथम, द्वितीय और तृतीयवर्गमूलके अर्धच्छेद मिलकर सातगुणे पल्यके अर्धच्छेदोंके आठवें भाग हैं। उनको १० कोड़ाकोड़ीसागरसे गुणा करनेपर और ७० कोड़ाकोड़ीसागरका भाग देनेसे पल्यके अर्धच्छेदोंके आठवेंभागप्रमाण होता है। सो यह अंतधन जानना) अंतधन को प्रत्येक जोड़के प्रति गुणकार ८से गुणा करनेपर पल्यके अर्धच्छेदप्रमाण हो जाता है। इसमेंसे आदिधन घटाया सो (पल्यकी वर्गशलाकाके द्वितीय व प्रथमवर्गके और पल्यकी वर्गशलाकाके अर्धच्छेद मिलनेसे सातगुणे पल्यकी वर्गशलाकाके अर्धच्छेद होते हैं। इनको १० कोड़ाकोड़ीसागरसे गुणाकरके ७० कोड़ाकोड़ीसागरका भाग देनेपर पल्यकी वर्गशलाकाके अर्धच्छेदप्रमाण आदिधन प्राप्त हुआ) आदिधन घटानेपर जो अवशेष बचे उनको गुणकार
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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