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________________ .......... गाम्मटसार कर्मकाण्ड-२०६........ अगमन १ उपशम १ क्षायिक सम्यज्य सन्यक्त्व अपूर्वकरण उपरम सम्यक्त्व भाविजसम्यक क्षयक चारित्र २क्षायिक सम्यक्त्व क्षायिक चरित्र अनिवृत्तिक. जमशभ चारित्र २ उपाय सम्बकत्र उपरम चारित्र २उपशम सम्यक्ष उपशम चारित्र २ उपशम सम्यक्त्व उपशम चारित्र | १२ चतुर्थगुणस्थान-[ १३ (उपर्युक्त १४में | उपर्युक्त ३ में सम्बन्धी तथा मन:- | से एक तिर्यञ्चगति से अभन्ध विना पर्ययज्ञान, सरा:- कम करनसे) | शेष २ चारित्र (१४) १२ उपर्युक्त १४ | ११ (उपर्युक्त १३मे | उपर्युक्त. ३ में से वेदकसम्यक्त्व से पीत व पद्य से अभव्य बिना और सरागचरित्र लेश्या क्रप की) शंष २ कम किया) २ (उपर्युक्त १४ | १५ ।। २ ॥ से वेदकसम्यक्रव और सरागवान जिस किया) ८ (मनुष्यगति लोभ, | उपर्युक्त ३ में से | २३ अज्ञान, असिद्धच अभव्य मिना और शुभलेश्या ।। शेष २ ४ (उपर्युक्त ५ से २ ।। १ लोभको काम किया) ४ (उपर्युक्त ५में से |२ । लोभको कम कियः सूक्ष्मसार उपशान्तकपाय क्षायिकसम्यक्त्व क्षीणकषाय क्षाविक सम्यक्च क्षायिकचारित्र ९ (सभी) सयोगी २ . ३ (मनुष्यगति, असिद्धत्व और शुक्त लेश्या) २ (मनुष्याति व असिद्धत्व अयोगी २ (अभव्यत्व बिना शंष) १ जीवत्व सिद्ध ५ (सम्यक्त्व दर्शन, ज्ञान बारा वीर्य तत्थेव मूलभंगा दस छव्वीसं कमेण पणतीसं । उगुवीसं दस पणगं ठाणं पडि उत्तरं वोच्छं ।।८२२ ।। अर्थ - पूर्वोक्त गाथामें कथित (मिथ्यात्वादि ३ गुणस्थान, असंयतादि चारगुणस्थान, उपशमश्रेणीके चारगुणस्थान, क्षपकश्रेणीके चारगुणस्थान, सयोगी-अयोगीगुणस्थान और सिद्ध इन) छह स्थानोंमें क्रमसे मूलभङ्ग १०-२६-३५-१९-१० व ५ हैं। इसके अनन्तर उनरभावोंको कहेंगे।
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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