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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-६५८ उदय-सत्त्व को अधिकरणरूप मानकर आधेयरूप बन्धस्थान के त्रिसंयोगसम्बन्धी सन्दृष्टि अधिकरण आधेय ५.न्य- ... स्थान संख्या उदयस्थान संबिल्यानगत प्रकृति संख्या का विवरण बन्धस्थान बन्धस्थानगत प्रकृतिसंख्या का विवरण संख्या २९ व ३० प्रकृतिक २१ प्रकृतिक २१ प्रकृतिक ९३ व ९१ प्रकृतिक | २ | ९२ व ९० प्रकृतिक | ६ । २१ प्रकृतिक २४ प्रकृतिक ८८-८४ व ८२ । ५ प्रकृतिक ९२-९०-८८-८४ | ५ ब८२ ९३ व ९१ प्रकृतिक | २ । ___९२ प्रकृतिक ६ २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिक २३-२५-२६-२९ व _३० प्रकृतिक २३-२५-२६-२९ व ३० प्रकृतिक २९ व ३० प्रकृतिक २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिक २५ प्रकृतिक २५ प्रकृतिक २५ प्रकृतिक २६ प्रकृतिक २६ प्रकृतिक ९०-८८-८४ व ८२| ५ | प्रकृतिक | ९३ व ९१ प्रकृक्तिक । ९२ व ९० प्रकृतिक | ६ | २३-२५-२६-२१ व ३० प्रकृतिक २९ प्रकृतिक २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिक २३-२५-२६-२९ व ३० प्रकृतिक २९ व ३० प्रकृतिक २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिक २६ प्रकृतिक २७ प्रकृतिक २७ प्रकृतिक ८८-८४ व ८२ । ५ प्रकृतिक ९३ व ११ प्रकृतिक | २ ९२ प्रकृतिक १ ।
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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