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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-६४९ तेणवदिसत्तसत्तं एवं पणछक्कवीसठाणुदये। चउवीसे बाणउदी णउदिचउक्कं च सत्तपदं ।।७६४ ॥ सगवीसचउक्कुदये तेणउदीछक्कमेवमिगितीसे। तिगिणउदी ण हि तीसे इगिपणसगअट्टणवयवीसुदये ॥७६५ ।। तेणउदिछक्कसत्तं इगिपणवीसेसु अस्थि बासीदी। तेण छचउवीसुदये बाणउदी णउदिचउसत्तं ।।७६६ ।। एवं खिगितीसे ण हि बासीदी एक्कतीसबंधेण। तीसुदये तेणउदी सत्तपदं एक्कमेव हवे ।।७६७॥ इगिबंधट्ठाणेण दु तीसट्ठाणोदये णिरुंधम्मि । पढमचऊसीटिचऊ सत्तट्ठाणाणि णामस्स ॥७६८ ॥ कुलयं ।। अर्थ - २३ प्रकृतिक बन्धमें २१ प्रकृतिरूप स्थानको आदि करके ९ उदयस्थान हैं और इन ९ उदयस्थानोंमेंसे आदिके चारस्थानों में सत्त्वस्थान ९२-९०-८८-८४ व ८२ प्रकृतिक पाँच हैं तथा शेष २७ आदि प्रकृतिरूप पाँच उदयस्थानोंमें ८२ प्रकृतिक सत्त्वस्थानबिना उपर्युक्त शेष चार सत्त्वस्थान हैं। २५ व २६ प्रकृतिक बन्धमें उदय-सत्त्वस्थान २३ प्रकृतिक बन्धके समान जानना। २८ प्रकृतिक बन्धमें २१ प्रकृतिक उदयसहित ९२ व ९० प्रकृतिक सत्त्वस्थान हैं तथा इसी बन्धमें २५ प्रकृतिक स्थानको आदिकरके पाँच उदयस्थानोंमें भी ९२-९० प्रकृतिक दो ही जानना, किन्तु विशेषता यह है कि २५ व २७ प्रकृतिक उदयस्थानमें जो ९० प्रकृतिक सत्त्व कहा है वह आहारककी अपेक्षा न होकर वैक्रियिककी अपेक्षा है। इसी २८ प्रकृतिक बन्धौ ३० व ३१ प्रकृतिक उदयस्थानसहित ९२ प्रकृतिक स्थानको आदिकरके चार सत्त्वस्थान हैं, किन्तु विशेषता इतनी है कि ३१ प्रकृतिका उदय होने पर ९१ प्रकृतिक सत्त्वस्थान नहीं है। २९ प्रकृतिक बन्धमें २१ प्रकृतिका उदय होनेपर ९३ आदि प्रकृतिरूप सात सत्त्वस्थान, २४ प्रकृतिक उदयमें ९२ प्रकृतिक और ९० आदि प्रकृतिरूप चार, इसप्रकार पाँच सत्त्वस्थान, २५ व २६ प्रकृतिरूप उदय होनेपर भी ९३ आदि प्रकृतिरूप सात सत्त्वस्थान, २७ आदि प्रकृतिरूप चार उदयस्थानोंमें ९३ प्रकृतिक स्थानको आदि करके ६ सत्त्वस्थान तथैव ३१ प्रकृतिक उदयमें ९३ आदि प्रकृतिरूप ६ सत्त्वस्थानोंमेंसे ९३ व ९१ प्रकृतिक स्थानबिना शेष चार सत्त्वस्थान हैं। ३० प्रकृतिक बन्धमें २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिरूप उदय होनेपर ९३ आदि प्रकृतिरूप ६ सत्त्वस्थान हैं, किन्तु विशेषता यह है कि ८२ प्रकृतिकस्थानका सत्त्व २१ व २५ प्रकृतिक उदयमें ही
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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