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गोम्मटसार कर्मकाण्ड ६२९
और २९ प्रकृतिरूप उदयसहित सत्त्व ९० प्रकृति का है। मिश्रगुणस्थान में मनुष्ययुत २९ प्रकृतिक बन्धमें २९ प्रकृतिका उदय और सत्त्व ९२ ९० प्रकृति का जानना । असंयतगुणस्थानमें मनुष्ययुत २९ प्रकृतिक बन्धमें उदय भवनत्रिदेवोंमें २९ प्रकृतिका तथा अन्य देवोंमें २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृति का है तथा सत्त्व सभी ९२ व ९० प्रकृतिका पाया जाता है। आनतस्वर्गसे उपरिमयैवेयकपर्यन्त देवोंके मिथ्यात्वगुणस्थानमें मनुष्ययुत २९ प्रकृतिक बन्धके साथ २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका उदय और ९२ व ९० प्रकृतिका सत्त्व पाया जाता है। सासादनगुणस्थानमें २९ प्रकृतिके बन्धमें २१-२५ व २९ प्रकृतिका उदय तथा ९० प्रकृतिका सत्त्व है। मिश्रगुणस्थानमें २९ प्रकृतिक पूर्वोक्त बन्धमें २९ ही प्रकृतिके उदयसहित ९२ व ९० प्रकृतिका सत्त्व होता है, असंयतगुणस्थानमें इसी २९ प्रकृतिरूप बन्धके साथ उदय २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका एवं सत्त्व ९२ व ९० प्रकृतिका है। अनुदिश व अनुत्तरविमानों के असंयतगुणस्थानमें मनुष्ययुत २९ प्रकृतिकबन्धमें २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका और सत्त्व ९२ व ९० प्रकृतिका है।
३० प्रकृतिका बन्धस्थान त्रसपर्याप्तउद्योत तिर्यञ्चगतियुत या मनुष्यगतितीर्थङ्करसहित अथवा देवगति- आहारकद्विकसहित होता है और इसका बन्ध चारोंगतिके जीवोंको होता है। नरकगतिके मिथ्यात्व और सासादनगुणस्थानमें पञ्चेन्द्रियतिर्यञ्चउद्योतसहित ३० प्रकृतिक बन्धमें मिथ्यात्वगुणस्थानमें उदय २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका और सत्त्व ९२ व ९० प्रकृतिका तथा सासादनगुणस्थानमें उदय २९ प्रकृतिका एवं सत्त्व ९० प्रकृतिका है; मिश्रगुणस्थानमें ३० प्रकृतिका बन्ध नहीं है, असंयतगुणस्थान में मनुष्य - तीर्थङ्करसहित ३० प्रकृतिक बन्धमें घर्मानरकमें उदय २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका एवं सत्त्व ९१ प्रकृतिका है। वंशा-मेघानरकमें उदय २९ व सत्त्व ९१ प्रकृतिका है, अञ्जनादिमें इसप्रकारका बन्ध नहीं है। मिथ्यादृष्टितिर्यञ्चोंके उद्योतयुत ३० प्रकृतिक बन्धमें उदय २१-२४-२५-२६-२७-२८२९-३० व ३१ प्रकृति का एवं सत्त्व ९२-९०-८८-८४ व ८२ प्रकृतिका है, सासादनगुणस्थान में पञ्चेन्द्रियतिर्यञ्च - उद्योतसहित ३० प्रकृतिक बन्धमें २१-२४-२६-३० व ३१ प्रकृतिक उदय और ९० प्रकृतिका सत्त्व है। यहाँ मिश्रादि तीनगुणस्थानोंमें इस प्रकारका बन्ध नहीं है। मिध्यादृष्टिमनुष्यके द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय, पञ्चेन्द्रियतिर्यञ्च व उद्योतसहित ३० प्रकृतिक बन्धमें २१-२६-२८- २९ व ३० प्रकृतिका उदय एवं ९२ ९०-८८ व ८४ प्रकृतिका सत्त्व है, सासादनगुणस्थानमें तिर्यञ्च व उद्योतसहित ३० प्रकृतिकबन्धमें २१ - २६ व ३० प्रकृतिक उदयसहित सत्त्व १० प्रकृतिका जानना । मिश्रसे प्रमत्तपर्यन्त चारगुणस्थानोंमें ३० प्रकृतिक बन्ध नहीं है, अप्रमत्त व अपूर्वकरणगुणस्थानमें देवगति व आहारकद्विकसहित ३० प्रकृतिक बन्धमें ३० प्रकृतिक उदयसहित ९२ प्रकृतिका सत्त्व है । भवनत्रिकसे सहस्रारस्वर्गपर्यन्त देवोंमें तिर्यञ्च-उद्योतसहित ३० प्रकृतिरूप बन्धमें मिथ्यात्वगुणस्थानमें २१-२५-२७-२८ व २९ प्रकृतिका उदय और ९० व ९२ प्रकृतिका सत्त्व है, सासादनगुणस्थानमें २१-२५ व २९ प्रकृतिरूप उदय तथा ९० प्रकृतिरूप सत्त्व है। मिश्र व असंयतगुणस्थानवर्ती भवनत्रिकदेवोंमें ३० प्रकृतिरूप बन्ध नहीं