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मोहनीयकर्म के सत्त्वस्थानों में बन्ध व उदयस्थानसम्बन्धी सन्दृष्टि -
गुण
बन्ध
उदय
उदयस्थानगत
सत्त्वस्थान
सत्त्वस्थानगत प्रकृति विवरण
बन्धस्थानगत प्रकृति विवरण
स्थान
स्थान
स्थान
प्रकृति विवरण
स्थान
मि.-स.-मिश्र.-क.-वे.-नो
मि.-क.-वे,-नोक.
मि.-स.-मिश्र.-क.-वे.-यु.-भ.-जु.
२८ | १-१-१-१६-३-६
प्रथम द्वितीय
।
चतुर्थ पंचम
५ से ११/ २२.२१,१७ / १-१६-१-४-२२
x-१६-१-४-२१ x-१२-१-४-१७ x-८-१-४-१३ ४-४-१-४९ x-४-१-x=4 ५-४-x-x=४ ४-३-x-x=३ x-२-x-x=२ ४-१-x-x=१
१०-९-
८ १ -४-०-४-१-२-१-१-१० ७-६-५-४] ___०-०-०-४-१-२-५- १ २१.
x-१-४-३-१-२-१-१९ x-१-४-२-१-२-१-१3८ ०-१-०-१-१-२-१-१७ ०-०-०-१-१-२-१-१-६ x-x-x-१-१-२-१-०-५ ४-४-४-१-१-२-०-०-४ ०-०-०-१-१-०-०-०-२
८वाँ
गोम्मटसार कर्मकाण्ड-५८८
रव
वाँ
१०वा
१-०-१-१६-३-६ १-०-०-१६-३-६ १-१-१.१२-३-६
१०बाँ प्रथम प्रथप २२ ३-४से । १७,५३,९ ११ तक ५,४,३,२,१ ४ से७ १७,१३ व १
0-0-0-00 १-१६-१-४२२
उपर्युक्तः उपर्युक्त
१०-९-८ १०-९-८ ९-८-७-६५-४-२-१ ९-८-७-६]
व५ ।
१-४-०-४-१-२-१-१=१० १-४-०-४-१-२-१-०९ १-x-०-४-१-२-०-०%3D८
३ से १०
*-१-१-१२-३.६
उपयुक्त
४-१-४-३-१-२-१-१-९
चतुर्थ
४-१-४-२-१-२-१-१ ८ x-१-४-१-१-२-१-१३
पंचम ६-७वा