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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-५१२ तिर्यञ्चमें २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृत्तिरूप छह स्थान हैं, मनुष्यमें २३-२५-२६-२८-२९३०-३१ और १ प्रकृतिरूप सर्जर शान हैं। भवाविङ र सौधर्मपाल २१:. २६. २९, ३० प्रकृतिक चारस्थान हैं। अनाहारमार्गणामें विग्रहगतिमें देव तथा नारकीके २९-३० प्रकृति के दो स्थान, तिर्यञ्चोंमें २३-२५-२६-२८-२९-३० प्रकृतिरूप छहस्थान हैं, इनमें देवगतिसंयुक्त २८ प्रकृतिरूपस्थान असंयतके ही होता है। मनुष्यके २३-२५-२६-२८-२९ और ३० प्रकृतिरूप छहस्थान हैं। इसप्रकार नामकर्मके बन्धस्थानोंका कथन मार्गणाओंमें किया। चौदह मार्गणाओंमें नामकर्मके बन्धस्थानसम्बन्धी सन्दृष्टिमार्गणा मार्गणा के भेद बंध स्थान बन्धस्थानगत प्रकृतिसंख्या संख्या १. नरकगति | २९ व ३० प्रकृतिक। २. तिर्यञ्चगति २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिका । ३. मनुष्यगति २३-२५-२६-२८-२९-३०-३१ व ५ प्रकृतिक । ४. देवति २५-२६-२९ व ३० प्रकृतिक। इन्द्रिय व काय| १. एकेन्द्रिय २३-२५-२६-२९ व ३० प्रकृतिक । (५ स्थावरकाय) २. विकलत्रय २३-२५-२६-२९ व ३० प्रकृतिक । (त्रसकाय) ३. पञ्चेन्द्रिय २३-२५-२६-२८-२९-३०-३१ व १ प्रकृतिक। (सकाय) चार मनोयोग २३-२५-२६-२८-२९-३०-३१ व १ प्रकृतिक । चार वचनयोग औदारिककाययोग औदारिकमिश्रकायवोग ६ | २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिक । वैक्रियिककाययोग २५-२६-२९ व ३० प्रकृतिक । वैक्रियिकमिश्रकाय आहारककाययोग । २ | २८ व २९ प्रकृतिक आहारकमिश्रकाय कार्मणकाययोग | ६ | २३-२५-२६-२८-२९ व ३० प्रकृतिक । योग
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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