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________________ 24 - YExt Thari A R गाथा सं. | पृष्ठ सं. विषय २६३-२७२ | २२७-२३२ उदयव्युच्छित्ति २७३-२७५ | २३४ केवलीभगवानके साता व असाता उदय व इन्द्रियजनित सुख-दुःख नहीं है, २७६-२७७ गुणास्थानोंमें उदय व अनुदयप्रकृतियाँ २७८-२८० | २३६-२३७ | उदय और उटीरणानें तीनगुणस्थानों में विशेषता २८१-२८३ | २३७ | गुणस्थानोंमें उदीरणा-अनुदौरणारूप प्रकृति २८४-२८२ | २३८-२४० | मार्गणाओंमें उदयसम्बन्धी विशेषता २९०-२९२ | २४० प्रधमनरकमें उदय व उदयव्युच्छित्ति | २४१ दूसरेसे सातवें नरकतक कर्मोदय व उदयव्युञ्छित्ति २९४-२९७ | २४२-२४५ तिर्यंचर्गातमें उदय त्र उदयव्युच्छित्ति २९८-३०१ | २४६-२५० मनुष्यगतिमें उदय व उदयव्युच्छित्ति ३०२-३०३ २५५ भोगभूमिजमनुष्य व तियंचमें उदय व उदयव्युच्छित्ति ३०४-३०५ | २५३-२५४ | देवगतिमें उदय व उदयव्युच्छित्ति ३०६-३०८ २५६ इन्द्रियमार्गणामें उदय व उदयव्युमिन्ति ३०९-३१० पू./२५९-२६० | कायमार्गणामें उदय त्र उदयव्युच्छित्ति उ.३१०-३१९ / २६२-२७१ | योगमार्गण में उदय व उदयव्यच्छित्ति ३२०-३२१ | २७३-२७५ | वेदमार्गणा उदय व उदयव्युच्छित्ति २७८ कषायमार्गणा उदय व उदयव्युच्छित्ति ३२३-३२५ पू. | २८२-२८१ | ज्ञानमाणा उदय व उदयव्युच्छिति २८४ मयममार्गणामें उदय व उदयव्युच्छित्ति २८७ दर्शनमार्गामें उदय व उतयव्युच्छित्ति ३२५ उ.-३२६२८२ लेश्यामार्गणामें कृष्ण-मील -कापोतलेश्यामें उदय व उदयन्युञ्छित्ति | २९१ शुभलेश्याओंमें उदय व उदयव्युच्छित्ति ३२८-३२९ २९४ भव्य-अभव्य व उपशम-क्षयोपशन तथा क्षायिकसम्यक्त्व उदय व उदयव्युच्छिनि ३३०-३३५ पू. २१९ संज्ञामारणाने उदय व उदयव्युच्छिन्तित ३३१ उ. ३३२३०२ आहारमार्गणा उदय व उदयव्युच्छित्ति ।। इति उदयप्रकरण ॥
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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