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________________ घण्टाकर्ण मंत्र कल्प: -- घण्टाकर्ण यंत्र की विधि प्रथम अष्ट गंध से प्रष्ट दल (कमल) बनावें, फिर घण्टाकर्ण: मूल मंत्र का जाप्य करें। फिर घंटे को बजावे, सर्व उपद्रव की शांति होती है, सर्व चतुष्पद (पशुओं) के रोगों का नाश होता है । घोड़ा, बैल आदि के रोगों की सर्व शांति होती है। जहां तक घंटे की ध्वनि जाती है, वहां तक के सर्व रोग नष्ट होते हैं । वहां सर्व शांति होती है, ऋद्धि, सिद्धि की वृद्धि, सर्व सुख की प्राप्ति होती है। . ... इति महावीराय नमः । .. (यंत्र चित्र नं. ७ देखे) . टाको हावीर दर्ज प्रावि बिगाहा॥ - विस्फोटकभयं प्राप्ने रक्ष रक्ष महाबल॥॥ HIAN HH . . नाकाले मरणं तस्यानच सण रयते। ... अग्निचौर मयं नासितःॐघटाकर्णोनमोस्तुतेठ ठ ठाझrol रोगासन प्रणस्यतिः वात पित्त कफोनवास पालतिष्ठतेदेव लिखिताक्षर क्तिभिः। __ NRHOEAntenticate यंत्र चित्र न ] - -
SR No.090176
Book TitleGhantamantrakalpa
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages88
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Worship, & Worship
File Size3 MB
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