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________________ नयवक्रसार अनुक्रमणिका पत्र. । ९१ विषय १ मंगलाचरण । चार अनुयोग तथा गुणठाणा आ श्रीजीवकाभेद और साधारण वैराग्य उपदेश तथा भवकी सामान्य विवक्षा और मीमांसादिक अर्थ दर्शनोका बिचार. २ द्रव्यका गुणका और पर्यायका लक्षण नय निक्षेपादिक सहित इणुके अन्तरभूत अन्यदर्शनीयोकी उन्मार्गता इत्यादिक. ३ पंचास्तिकायका स्वरूप तथा एकेक द्रव्यका भिम मिन्न लक्षण इत्यादि. विषय ४ पंचास्तिकायका सामान्य विशेष धर्म, ५ असिस्वभावका लक्षण और नास्तिस्वभावका लक्षण. ६ अर्पित अनर्पितपणे एकधर्म सप्तभंगी देखाइ है. १०५ ७ अत्यंत विस्तारसहित स्वरूपपणे सप्तभंगी देखाइहै १०८ ८ गुणनी सप्तभंगीआ देखाई है. ९ नित्यानित्यस्वभावमें और अस्ति नास्ति स्वभा बमें उत्पाद व्ययका एक भेद दुसरा.
SR No.090175
Book TitleJivvicharadiprakaransangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJindattsuri Gyanbhandar Surat
PublisherJindattsuri Gyanbhandar
Publication Year
Total Pages305
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size7 MB
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