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________________ उत्पाद व्यय छे तेज रीतें नास्तितानो पण उत्पाद व्यय जाणवो. जे पहेली घटनास्तिता हती ते पछे घटध्वंसें कपाल | नास्तिता थयी. एम परद्रव्यने पलटवे नास्तिता' पलटे छे ते स्वगणने परिणामिक कार्यने पलटवे करीने अस्तिता पलटे छे अने जिहां पलटवापणो तिहां उत्पाद व्यय थायज. एम द्रव्यमा सामान्य स्वभाव सर्व धर्म छे तेमां जेम संभवे तेम [श्री प्रभुनी आज्ञायें उपयोग देइने उत्पाद व्ययपणो करवो अने अस्तिनास्तिपण ध्रुव छे ए पांचमो अधिकार कह्यो. तथा पुनः अगुरुलघुपर्यायाणां षडणहानिवृद्धिरूपाणां प्रतिद्रव्यं परिणमनात् नानाहानिव्ययेवृद्धयुत्पादः वृद्धिव्यये हान्युत्पादः ध्रुवत्वं चागुरुलघुपर्यायाणां एवं सर्वद्रव्येषु ज्ञेयं "तत्वार्थवृत्तौं” आकाशाधिकारे यत्राप्यवगाहकजीवपुद्गलादिर्नास्ति तत्राप्यगुरुलघुपर्यायवर्त्तनयावश्यत्वे चानित्यताभ्युपेया ते च अन्ये अन्ये च भवन्ति अन्यथा तत्र नवोत्पादव्ययौ नापेक्षिकाविति न्यूनं एवं सल्लक्षणं स्यात् इति षष्ठः ॥ अर्थ-तथा के० तेमज वली सर्वद्रव्य तथा पर्याय ते अगुरुलघु धर्मे संयुक्त होय द्रव्यने प्रदेशे अगुरुलघु अनंतो छे. ते अगुरुलधु समय समय प्रदेशे तथा पर्यायें कोइक घारें वृद्धि पामे कोइक बारें घटी जाय ते वधुघटु थवो छ छ। प्रकारें छे. १ अनंत भाग हानि, २ असंख्यात भाग हानि, ३ संख्यात भाग हानि, ४ संख्यात गुण हानि, ५ असंख्यात | गुण हानि, ६ अनंत गुण हानि, ए छ प्रकारे हानि तथा १ अनंत भाग वृद्धि, २ असंख्यात भाग वृद्धि, ३ संख्यात % %
SR No.090175
Book TitleJivvicharadiprakaransangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJindattsuri Gyanbhandar Surat
PublisherJindattsuri Gyanbhandar
Publication Year
Total Pages305
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size7 MB
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