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________________ ७९८ उ. गोयमा ! सवेयए होज्जा, नो अवेयए होज्जा । प. जड़ सवेयए होज्जा, कि इत्यिवेयए होज्जा, पुरिसवेयए होज्जा, पुरिस - नपुंसगवेयए होज्जा ? उ. गोयमा ! नो इत्थिवेयए होज्जा, पुरिसवेयए होज्जा, पुरिस - नपुसंगवेयए वा होज्जा । प. २. बउसे णं भंते! किं सवेयए होज्जा, अवेयए होज्जा ? उ. गोयमा ! सवेयए होज्जा, नो अवेयए होज्जा । प. जइ सवेयए होज्जा, किं इथिवेयए होज्जा, पुरिसवेयए होज्जा, पुरिसनपुंसगवेयए होज्जा ? उ. गोयमा इत्यिवेयए या होज्जा, पुरिसवेयए वा होज्जा, पुरिसनपुंसगवेयए या होज्जा । ३ (क) एवं पडिसेवणाकुसीले वि। प. ३ (ख) कसायकुसीले णं भंते किं सवेयए होज्जा, अवेयर होज्जा ? उ. गोवमा ! सवेयए वा होज्जा, अवेयए वा होज्जा प. जइ अवेयए होज्जा किं उवसंतवेयए होज्जा, खीणवेयए होज्जा ? उ. गोयमा उवसंतवेयए या होज्जा, खीणवेयए था होज्जा । प. जइ सवेयए होज्जा, कि इत्थवेयए होज्जा, पुरिसवेयए होज्जा, पुरिसनपुंसगवेयए होज्जा ? उ. गोयमा ! तिसु वि होज्जा, जहा बउसो । प. ४. नियंठे णं भंते! किं सवेयए होज्जा, अवेयए होज्जा ? उ. गोयमा ! नो सवेयए होज्जा, अवेयर होना । प. जइ अवेयए होज्जा, किं उवसंतवेयए होज्जा, खीणवेयए होज्जा ? उ. गोयमा ! उवसंतवेयए या होज्जा, खीणवेयए था होज्जा प. ५. सिणाए णं भंते! किं सवेयए होज्जा, अवेयए होज्जा ? उ. गोयमा ! जहा णिवंडे तहा सिणाए वि वर-नो उवसंतवेयए होज्जा, खीणवेयए होज्जा । ३. राग - दारं प. १. पुलाए णं भंते किं सरागे होज्जा, वीयरागे होज्जा ? उ. गोयमा ! सरागे होज्जा, नो वीयरागे होज्जा, २-३ एवं जाव कसायकुसीले । प. ४. नियंठे णं भंते! किं सरागे होज्जा, वीयरागे होज्जा ? उ. गोयमा नो सरागे होज्जा, बीयरागे होज्जा । प. जइ वीयरागे होज्जा, किं उवसंतकसाय- वीयरागे होज्जा, रवीणकाय बीयरागे होज्जा ? उ. प्र. उ. गौतम ! स्त्री-वेदक नहीं होता है, पुरुष-वेदक होता है या पुरुषनपुंसक वेदक होता है। प्र. २. भंते ! बकुश क्या सवेदक होता है या अवेदक होता है ? उ. गौतम! सवेदक होता है, अवेदक नहीं होता है। प्र. उ. प्र. द्रव्यानुयोग - (२) गौतम! सवेदक होता है, अवेदक नहीं होता है। यदि सवेदक होता है तो क्या स्त्री-वेदक होता है, पुरुष- वेदक होता है या पुरुषनपुंसक वेदक होता है? उ. गौतम ! स्त्री-वेदक भी होता है, पुरुष-वेदक भी होता है और पुरुषनपुंसक वेदक भी होता है। ३ (क) प्रतिसेवनाकुशील के लिए भी इसी प्रकार जानना चाहिए। प्र. भंते! कषायकुशील क्या सवेदक होता है या अवेदक होता है? उ. प्र. उ. प्र. यदि सवेदक होता है तो क्या स्त्री-वेदक होता है, पुरुष-वेदक होता है या पुरुषनपुंसक वेदक होता है ? उ. गौतम ! उपशान्तवेदक भी होता है और क्षीणवेदक भी होता है। प्र. यदि सवेदक होता है तो क्या स्त्री-वेदक होता है, पुरुष-वेदक होता है या पुरुषनपुंसक वेदक होता है ? गौतम ! बकुश के समान तीनों वेद वाले होते हैं। ४. भंते! निर्ग्रन्थ क्या सवेदक होता है या अवेदक होता है ? गौतम ! सवेदक भी होता है और अवेदक भी होता है। यदि अवेदक होता है तो क्या उपशान्तवेदक होता है या क्षीणवेदक होता है ? उ. प्र. गौतम ! सवेदक नहीं होता है, अवेदक होता है। यदि अवेदक होता है तो क्या उपशान्त-वेदक होता है या क्षीण-बेदक होता है? उ. गौतम ! उपशान्त-वेदक भी होता है और क्षीण-वेदक भी होता है प्र. ५. भंते ! स्नातक क्या सवेदक होता है या अवेदक होता है ? उ. गौतम ! निर्ग्रन्थ के समान ही स्नातक का कथन करना चाहिए। विशेष स्नातक उपशान्त वेदक नहीं होता है, किन्तु क्षीण वेदक होता है। ३. राग-द्वार प्र. १. भंते! पुलाक क्या सराग होता है या वीतराग होता है ? गौतम ! वह सराग होता है, वीतराग नहीं होता है। उ. २-३ इसी प्रकार कषायकुशीत पर्यन्त जानना चाहिए। प्र. भंते! निर्ग्रन्थ क्या सराग होता है या वीतराग होता है ? गौतम ! सराग नहीं होता है, वीतराग होता है। यदि वीतराग होता है तो क्या उपशान्त कषाय वीतराग होता है या क्षीणकषाय वीतराग होता है?
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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