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________________ सूत्र विषय पृष्ठांक | सूत्र विषय पृष्ठांक ५. दुर्गति और सुगति में गमन हेतु का प्ररूपण, १२४३-१२४४ ६. दुर्गत-सुगत के भेदों का प्ररूपण, १२४४ ७. चार गतियों में पर्याप्तियाँ-अपर्याप्तियाँ, १२४४-१२४५ ८. चार गतियों में परित्त संख्या का प्ररूपण, १२४५-१२४६ ९. चार गति और सिद्ध की कायस्थिति का प्ररूपण, १२४६ १०. जलचरादि पंचेन्द्रिय तिर्यञ्चयोनिकों की कायस्थिति का प्ररूपण, १२४६-१२४७ ११. पर्याप्त-अपर्याप्त चार गतियों की कायस्थिति का प्ररूपण, १२४७ १२. प्रथम-अप्रथम चार गतियों और सिद्ध की कायस्थिति के काल का प्ररूपण, १२४७-१२४८ १३. चार गतियों और सिद्धों में अंतरकाल का प्ररूपण, १२४८-१२४९ १४. प्रथम-अप्रथम चार गतियों और सिद्ध के अंतरकाल का प्ररूपण, १२४९ १५. पाँच या आठ गतियों की अपेक्षा जीवों का अल्पबहुत्व, १२४९-१२५० १६. प्रथम-अप्रथम चार गतियों और सिद्ध का अल्पबहुत्व, १२५०-१२५१ ३४. नरक गति अध्ययन १. नरक गमन के कारणों का प्ररूपण, १२५३ २. नरक पृथ्वियों में पृथ्वी आदि के स्पर्श का प्ररूपण, १२५३ ३. नरकों में पूर्वकृत दुष्कृत कर्म फलों का वेदन, १२५३-१२५६ ४. नैरयिकों के नैरयिक भावादि अनुभवन का प्ररूपण, १२५६ ५. नरक पृथ्वियों में पुद्गल परिणामों के । अनुभवन का प्ररूपण, १२५६-१२५७ ६. नैरयिक का मनुष्य लोक में अनागमन के चार कारण, १२५७ ७. चार सौ-पाँच सौ योजन नरकलोक नैरयिकों से व्याप्त होने का प्ररूपण, १२५७ ८. नरकावासों के पार्श्ववासी पृथ्वीकायिकादि जीवों के महाकर्मतरादि का प्ररूपण, १२५८ ३५. तिर्यञ्च गति अध्ययन १. प्रत्युत्पन्न षट्कायिक जीवों के निर्लेपन काल का प्ररूपण, १२६२ २. त्रस और स्थावरों के भेदों का प्ररूपण, १२६२ ३. जीवों के काय की विवक्षा से भेद, १२६२ ४. स्थावर कायों के भेद और उनके अधिपतियों का प्ररूपण, १२६२-१२६३ ५. स्थावरकायिकों की गति-अगति समापनकादि की विवक्षा से द्विविधत्व का प्ररूपण, १२६३ ६. स्थावरकायिक जीवों का परस्पर अवगाढ़त्व का प्ररूपण, १२६३-१२६४ ७. सूक्ष्म स्नेहकाय के पतन का प्ररूपण, १२६४ ८. अल्प महावृष्टि के हेतुओं का प्ररूपण, १२६४-१२६५ ९. अधिकरणी से वायुकाय की उत्पत्ति और विनाश का प्ररूपण, १२६५ १०. अचित्त वायुकाय के प्रकार, १२६५ ११. एकेन्द्रिय जीवों में स्यात् लेश्यादि बारह द्वारों का प्ररूपण, १२६५-१२६८ १२. लेश्यादि बारह द्वारों का विकलेन्द्रिय जीवों में प्ररूपण, १२६८-१२६९ १३. लेश्यादि बारह द्वारों का पंचेन्द्रिय जीवों में प्ररूपण, १२६९-१२७० १४. विकलेन्द्रिय और पंचेन्द्रिय जीवों का अल्पबहुत्व, १२७० १५. सामान्यतः एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का प्ररूपण, १२७० १६. पृथ्वीकायिकादि पाँच स्थावरों में सूक्ष्मत्व बादरत्वादि का प्ररूपण, १२७०-१२७१ १७. पृथ्वीकाय आदि का लोक में प्ररूपण, १२७१ १८. पृथ्वी शरीर की विशालता का प्ररूपण, १२७१-१२७२. १९. पृथ्वीकायिक की शरीरावगाहना का प्ररूपण, १२७२ २०. एकेन्द्रियों का अवगाहना की अपेक्षा अल्पबहुत्व, १२७२-१२७४ २१. अनन्तरोपपन्नक एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का प्ररूपण, __ १२७४-१२७५ २२. परम्परोपपन्नक एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का प्ररूपण, १२७५ २३. अनन्तरोवगाढ़ादि एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का । प्ररूपण, १२७५ २४. कृष्णलेश्यी एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का प्ररूपण, १२७५-१२७६ २५. अनन्तरोपपन्नक कृष्णलेश्यी एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का प्ररूपण, १२७६ २६.. परम्परोपपत्रक कृष्णलेश्यी एकेन्द्रियों के भेद-प्रभेदों का प्ररूपण, १२७६
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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