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________________ सूत्र विषय १६०. प्रथम समय जिन भगवन्त के कर्मक्षय का प्ररूपण, १६१. प्रथम समय सिद्ध के कर्मक्षय का प्ररूपण, १६२. जीव- चौबीसडकों में आठ कर्मप्रकृतियों के अविभाग परिच्छेद और आवेष्टन परिवेष्टन, १६३. कर्मों के प्रदेशाग्र-परिमाण का प्ररूपण, १६४. आठ कर्मों के वर्णादि का प्ररूपण, १६५. वस्त्र में पुद्गलोपचय के दृष्टान्त द्वारा जीव १२०९ चौबीसदंडकों में कर्मोपचय का प्ररूपण, १२०८-१२०९ १६६. कर्मोपचय की सादि सान्तता आदि का प्ररूपण, १६७. चौबीसदंडकों में महाकर्म- अल्पकर्मत्व आदि के कारणों का प्ररूपण, १६८. तु के दृष्टांत से जीवों के गुरुत्व-समुख के कारणों का प्ररूपण, १६९. चरमाचरम की अपेक्षा जीव- चौबीसदंडकों में महाकर्मत्वादि का प्ररूपण, १७०. अल्पमहाकर्पादि युक्त जीव के बंधादि पुद्गलों का परिणमन, १७१. कर्म पुद्गलों के काल पक्ष का प्ररूपण, १७२. कर्म रज के ग्रहण और त्याग के हेतुओं का प्ररूपण, १७३. देवों द्वारा अनन्त कर्माशों के क्षय काल का प्ररूपण, १७४. कर्म विशोधि की अपेक्षा चौदह जीव स्थानों (गुण स्थानों) के नाम, १७५. कर्म का वेदन किये बिना मोक्ष नहीं, १७६. व्यवदान के फल का प्ररूपण, १७७. अकर्म जीव की ऊर्ध्व गति होने के हेतुओं का प्ररूपण, ३२. वेदना अध्ययन १. सामान्य वेदना, २. वेदनाऽध्ययन के अर्थाधिकार, ३. सात द्वारों में और चौबीसदंडकों में वेदना का प्ररूपण, ४. करण के भेद और चौबीसदंडकों में उनका प्ररूपण, ५. चौबीसदंडकों में दुःख की स्पर्शना आदि का प्ररूपण, ६. एवम्भूत - अनेवम्भूत वेदना का प्ररूपण, ७. एकेन्द्रिय जीवों में वेदनानुभव का प्ररूपण, पृष्ठांक १२०६ १२०६ १२०७ १२०८ १२०८ १२०९-१२१० १२१०-१२११ १२११ १२१२-१२१३ १२१३-१२१४ १२१४ १२१४-१२१५ १२१५-१२१६ १२१६ १२१६ १२१६-१२१७ १२१९ १२१९ १२१९-१२२२ १२२२-१२२३ १२२४ १२२४-१२२५ १२२५ ( २८ ) सूत्र विषय ८. नैरयिकों में दस प्रकार की वेदनाएँ, १२२५ ९. नैरयिकों की उष्ण-शीत वेदना का प्ररूपण, १२२५-१२२८ १०. नैरयिकों की भूख-प्यास की वेदना का प्ररूपण, १२२८ ११. नैरयिकों को नरकपालों द्वारा दस वेदनाओं का प्ररूपण, १२. असंज्ञी जीवों के अकामनिकरण वेदना का प्ररूपण, १३. समर्थ के द्वारा अकाम - प्रकाम वेदना का वेदन, १४. विविध भाव परिणत जीव का एकभावादि रूप परिणमन, १५. जीव- चौबीसदंडकों में स्वयंकृत दुःख वेदन का प्ररूपण. १६. जीव-चौबीसदंडकों में आत्मकृत दुःख के वेदन का प्ररूपण, २६. त्रिकाल की अपेक्षा वेदना और निर्जरा में अंतर एवं चौबीसदंडकों में प्ररूपण, २७. विविध दृष्टांतों द्वारा महावेदना और महानिर्जरा युक्त जीवों का प्ररूपण, २८. चौबीसदंडकों में अल्प महावेदना के वेदन का प्ररूपण, २९. वेदना अध्ययन का उपसंहार, ३३. गति अध्ययन १. पाँच प्रकार की गतियों के नाम, २. आठ प्रकार की गतियों के नाम, पृष्ठांक ३. दस प्रकार की गतियों के नाम, ४. दुर्गति सुगति के भेदों का प्ररूपण, १२२८-१२३० १२३० १२३०-१२३१ १७. साता-असाता के छह-छह भेदों का प्ररूपण, १८. सुख के दस प्रकारों का प्ररूपण, १९. विमात्रा से सुख - दु:ख वेदना का प्ररूपण, २०. सर्व जीवों के सुख-दु:ख को अणुमात्र भी दिखाने में असामर्थ्य का प्ररूपण, २१. जीव- चौबीसदंडकों में जरा-शोक वेदन का प्ररूपण, १२३४-१२३५ १२३५ २२. संक्लेश- असंक्लेश के दस प्रकारों का प्ररूपण, २३. अल्प महावेदना और निर्जरा का स्वामित्व, १२३५-१२३६ २४. वेदना और निर्जरा में भिन्नता और चौबीसदंडकों में प्ररूपण, २५. वेदना और निर्जरा के समयों में पृथकत्व एवं चौबीसदंडकों में प्ररूपण, १२३१ १२३१-१२३२ १२३२ १२३२ १२३२-१२३३ १२३३ १२३३-१२३४ १२३६ १२३६-१२३७ १२३७-१२३८ १२३८-१२३९ १२३९-१२४० १२४० १२४३ १२४३ १२४३ १२४३
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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