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________________ ८९४ ( ८९४ ) जहण्णगा पम्हलेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णगा सुक्कलेसट्ठाणा दव्बट्ठयाए असंखेज्जगुणा, पएसट्ठयाएसव्वत्थोवा जहण्णगा काउलेसट्ठाणा पएसट्ठयाए, जहण्णगाणीललेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णगा कण्हलेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णगा तेउलेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णगा पम्हलेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णगा सुक्कलेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, दव्वट्ठ-पएसठ्ठयाएसव्वत्थोवा जहण्णगा काउलेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए, जहण्णगा णीललेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, एवं कण्हलेस्सट्ठाणा तेउलेस्सट्ठाणा पम्हलेस्सट्ठाणा, जहण्णगा सुक्कलेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, जहण्णएहिंतो सुक्कलेस्सट्ठाणेहिंतो दव्वट्ठयाए जहण्णगा काउलेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए अणंतगुणा, जहण्णगाणीललेस्सट्ठाणा पएसट्ठयाए असंखेज्जगुणा, एवं जाव सुक्कलेस्सट्ठाणा। द्रव्यानुयोग-(२) (उनसे) पद्मलेश्या के जघन्य स्थान द्रव्य की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) शुक्ललेश्या के जघन्य स्थान द्रव्य की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, प्रदेशों की अपेक्षा सेसबसे अल्प प्रदेशों की अपेक्षा कापोतलेश्या के जघन्य स्थान है, (उनसे) नीललेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) कृष्णलेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) तेजोलेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) पदम्लेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) शुक्ललेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, द्रव्य और प्रदेशों की अपेक्षा सेसबसे अल्प द्रव्य की अपेक्षा कापोतलेश्या के जघन्य स्थान हैं, (उनसे) नीललेश्या के जघन्य स्थान द्रव्य की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, इसी प्रकार जघन्य कृष्णलेश्या स्थान, तेजोलेश्या स्थान, पद्मलेश्या स्थान भी क्रमशः असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) शुक्ललेश्या के जघन्य स्थान द्रव्य की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, द्रव्य की अपेक्षा जघन्य शुक्ललेश्या स्थानों से कापोतलेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा अनन्तगुणे हैं, नीललेश्या के जघन्य स्थान प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, इसी प्रकार शुक्ललेश्या के स्थानों पर्यन्त असंख्यातगुणे जानना चाहिए। प्र. भंते ! इन कृष्णलेश्या के उत्कृष्ट स्थानों यावत् शुक्ललेश्या के उत्कृष्ट स्थानों में से द्रव्य की अपेक्षा से, प्रदेशों की अपेक्षा से तथा द्रव्य और प्रदेशों की अपेक्षा से कौन, किससे अल्प यावत विशेषाधिक हैं? उ. गौतम ! सबसे अल्प द्रव्य की अपेक्षा कापोतलेश्या के उत्कृष्ट स्थान हैं। (उनसे) नीललेश्या के उत्कृष्ट स्थान द्रव्य की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं। इसी प्रकार जघन्य स्थानों के अल्पबहुत्व के समान उत्कृष्ट स्थानों का भी अल्पबहुत्व जानना चाहिए। विशेष-जघन्य शब्द के स्थान में उत्कृष्ट शब्द कहना चाहिए। प्र. भंते ! इन कृष्णलेश्या यावत् शुक्ललेश्या के जघन्य और उत्कृष्ट स्थानों में द्रव्य की अपेक्षा से, प्रदेशों की अपेक्षा से तथा द्रव्य और प्रदेशों की अपेक्षा से कौन, किससे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं ? द्रव्य की अपेक्षा सेउ. गौतम ! द्रव्य की अपेक्षा सबसे थोड़े कापोतलेश्या के जघन्य स्थान हैं, (उनसे) नीललेश्या के जघन्य स्थान द्रव्य की अपेक्षा असंख्यातगुणे हैं, प. एएसि णं भंते ! कण्हलेस्सट्ठाणाणं जाव सुक्कलेस्सट्ठाणाण य उक्कोसगाणं दव्वट्ठयाए, पएसट्ठयाए, दव्वट्ठपएसट्ठयाए कयरे कयरेहितो अप्पा वा जाब विसेसाहिया वा? उ. गोयमा ! सव्वत्थोवा उक्कोसगा काउलेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए, उक्कोसगाणीललेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा, एवं जहेव जहण्णगा तहेव उक्कोसगा वि, णवर-उक्कोसत्ति अभिलावो। एएसि णं भंते ! कण्हलेस्सट्ठाणाणं जाव सुक्कलेस्सट्ठाणाण य जहण्णुक्कोसगाणं दव्वट्ठयाए, पएसट्ठाए, दव्वट्ठपएसट्ठयाए कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा? दव्वट्ठायाएउ. गोयमा ! सव्वत्थोवा जहण्णगा काउलेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए, जहण्णगा णीललेस्सट्ठाणा दव्वट्ठयाए असंखेज्जगुणा,
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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