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________________ २५६ २. तसकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा। प. एएसि णं भंते ! सकाइयाणं, पुढविकाइयाणं, आउकाइयाणं, तेउकाइयाणं, वाउकाइयाणं, वणस्सइकाइयाणं, तसकाइयाण य पज्जत्ताऽपज्जत्तगाण य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा? उ. गोयमा !१. सव्वत्थोवा तसकाइया पज्जत्तगा, २. तसकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा, ३. तेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा, ४. पुढविकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, ५. आउकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, ६. वाउकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, ७. तेउकाइया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा, ८. पुढविकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया, ९. आउकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया, १०. वाउकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया, ११. वणस्सइकाइया अपज्जत्तगा अणंतगुणा, १२. सकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, १३. वणस्सइकाइया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा, १४. सकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया, १५. सकाइया विसेसाहिया। - -पण्ण.प.३,सु. २३२-२३६ १४६. तस-थावराणं अप्पबहुतंप. एएसि णं भंते ! तसाणं थावराण य कयरे कयरेहितो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा? उ. गोयमा!१.सव्वत्थोवा तसा, , २. थावरा अणंतगुणा। -जीवा. पडि.१, सु.४३ द्रव्यानुयोग-(१) २. (उनसे) अपर्याप्तक त्रसकायिक असंख्यातगुणे हैं। प्र. भंते ! इन सकायिक, पृथ्वीकायिक, अप्कायिक, तेजस्कायिक, वायुकायिक, वनस्पतिकायिक और त्रसकायिक पर्याप्तक और अपर्याप्तक में से कौन किनसे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं ? उ. गौतम ! १. सबसे अल्प त्रसकायिक पर्याप्तक हैं, २. (उनसे) त्रसकायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, ३. (उनसे) तेजस्कायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, ४. (उनसे) पृथ्वीकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, ५. (उनसे) अप्कायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, ६. (उनसे) वायुकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, ७. (उनसे) तेजस्कायिक पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं, ८. (उनसे) पृथ्वीकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, ९. (उनसे) अकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, १०. (उनसे) वायुकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, ११. (उनसे) वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक अनन्तगुणे हैं, १२. (उनसे) सकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, १३. (उनसे) वनस्पतिकायिक पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं, १४. (उनसे) सकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, १५. (उनसे) सकायिक विशेषाधिक हैं। १४६. त्रस और स्थावरों का अल्पबहुत्व प्र. भंते ! इन त्रसों और स्थावरों में कौन किनसे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं ? उ. गौतम ! १. सबसे अल्प त्रस हैं, २. (उनसे) स्थावर जीव अनन्तगुणे हैं। . १४७. परीतादि जीवों का अल्पबहुत्व प्र. भंते ! इन परीत, अपरीत और नो परीत नो अपरीत जीवों में से कौन किनसे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं ? १४७. परित्ताइ जीवाणं अप्पबहुतं प. एएसि णं भंते ! जीवाणं परित्ताणं, अपरित्ताणं, नो परित्तनोअपरित्ताण य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा? जगोरामा | मलशोता नीना गिना .. भवासाद्धयाइ जीवाणं अप्पबहत्तं- - प. एएसि णं भंते ! जीवाणं भवसिद्धियाणं अभवसिद्धियाणं, णो भवसिद्धिय णो अभवसिद्धियाण यकयरे कयरेहितो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा? उ. गोयमा !१. सव्वत्थोवा जीवा अभवसिद्धिया, १४८. भवसिद्धिकादि जीवों का अल्पबहुत्व प्र. भंते ! इन भवसिद्धिक,अभवसिद्धिक और नो भवसिद्धिक नो अभवसिद्धिक जीवों में से कौन किनसे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं ? उ. गौतम ! १. सबसे अल्प अभवसिद्धिक जीव हैं, १. जीवा. पडि.५, सु. २१३ २. जीवा. पडि.५, सु.२१३ ३. जीवा. पडि. ९, सु.२३८ उ. गायमा !१.सव्वत्थावा जावा अभवासद्धिया, उ. गौतम ! १. सबसे अल्प अभवसिद्धिक जीव हैं, १. जीवा. पडि.५,सु.२१३ २. जीवा. पडि. ५, सु. २१३ ३. जीवा. पडि.९, सु. २३८
SR No.090158
Book TitleDravyanuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1994
Total Pages910
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size32 MB
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