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________________ पुण्याह वाचनं । ॐ वृषभसेन, सिंहसेन, चारुसेन, वज्रनाभि, चमर, वज्रचमर, बलदत्त, विदर्भ, अनगार, कुन्थु, धर्म, मंदर, जयार्य, अरिष्टसेन, चक्राभुध, स्वयंभू, कुमार्य, विशाल, मल्लि, सुप्रभ, बरदत्त, स्वयांभू, गौतमाश्चति चतुर्विंशतितीर्थकरसभाभासमानगणधर मुख्याश्च वः प्रीयंतां२ । ब्राह्मी, आत्मगुप्ता, धर्मश्री, मेरुषेणा, अनंतमति, रतिपेणा, मीनश्री, वरुणश्री, घोषावती, धरणश्री, धारणा, वरसेना, पद्मश्री, सनश्री, सुव्रता, हरिषेणा, भावश्री, कूर्मश्री, अमरसेना, पुष्पदंता, मार्गश्री, यक्षश्री, सुलोचना, चन्दनाचोति चतुर्विंशतिगणिनीमुख्याश्च वः प्रीयंतां२। श्रेयांस, ब्रह्मदत्त, सुरेन्द्रदत्त, इन्द्रदत्त, पद्मदत्त, सोमदत्त, महेंद्रदत्त, पुष्पमित्र, पुनर्वसु, नंदन, सौंदर, जय, विशाख, धान्यसेन, धर्ममित्र, सुमित्र, अपराजित, नंदी, नंदिसेन, वृषभसेन, दत्त, बरदत्त, धान्य, नंदनाश्चेति चतुर्विंशतिदातृमुख्याश्च वः प्रीयंतां२। भरत, सत्यभाव, सत्यवीर्य, मित्रभाव, मित्रवीर्य, धर्मवीर्य, दानवीर्य, मघव, युद्धवीर्य, श्रीमन्दर, त्रिपिष्ट, द्विपिष्ट, स्वयंभू, पुरुषोत्तम, पुरुषवर, पुण्डरीक, दत्त कुनाल, नारायण, सुभौम, अजितंजय, उग्रसेन, अजित, श्रेणिकाश्चेति चतुर्विंशतिश्रोतृमुख्याश्च वः प्रीयंतां२ ॥ गोमुख, महायक्ष, त्रिमुख, यक्षेश्वर तुम्बरू, कुसुम, वरनंदी,
SR No.090154
Book TitleDigambar Jain Vratoddyapan Sangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorFulchand Surchand Doshi
PublisherDigambar Jain Pustakalay
Publication Year1986
Total Pages408
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size20 MB
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