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________________ विषयसूची विषय श्लोकाङक २८-३१ ३४-३६ २-३ ४-७ । ८१ ९-१०,१३१ ११-१२ १२*१-२,१३२२-४ अनर्थदण्डव्रत का फल-उदाहरण अनर्थदण्डव्रत का महाव्रतपना गुणवत नाम की सार्थकता गुणवतों का फल १५. सामायिक प्रतिमा का विस्तार जिनपूजा का फल पूजा व्यर्थ है यह कुतर्क व्याख्यानादि का स्वरूप और जिनदेव की सिद्धि सिद्धि के लिये एकलव्य का उदाहरण प्रतिमापूजन पुण्य का कारण पूजक को विशुद्धि की आवश्यकता स्नान की जरूरी स्नान के प्रकार स्नान का मन्त्र गृहस्थों के दो धर्म पूजा के लिये शुद्धि पूजाद्रव्य पूजा की पद्धति आह्वानन मन्त्र सकलदेवताह्वान मन्त्रजप का विधि मन्ाराज जपसंख्या और समय ध्यान का हेतु ध्यानरूप पुष्पांजलि के मन्त्र ध्यानपद्धति मण्डलार्चन सामायिक व्रत व्रत का फल सामायिक के भेद सामायिक के समय सामायिक की पद्धति सामायिक के अतिचार व्रती के भेद १३*५-८ १३२९-१० १४-२० २१-४९, ५७-६१ ४९.१-१२ ५१ ५२ ५४ ५५-५६ ६११-६२ ६३-६४ . ६४.१ ६५-६७ ६८-६९ ७०-७०*१ ७०२२-७३ ७४-७५ ७५*१ ७६-७७
SR No.090136
Book TitleDharmaratnakar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaysen, A N Upadhye
PublisherJain Sanskruti Samrakshak Sangh
Publication Year1974
Total Pages530
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Principle
File Size38 MB
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