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________________ वारी हो बधाई घा शुभ साजै । विश्वसेन ऐरादेवी - गृह, (५८) जिनभवमंगल सज सब अमरेश, अशेष विभवजुत, नगर नागपुर नाग-दत्त सुर-इन्द्रवचनतें, ऐरावत लखजोजन शतवदन वदनवसु रद प्रतिसर ठहराये। सर सर सौ-पन वीस नलिनप्रति पदम पचीस विराजै ॥ १ ॥ वारी. ॥ छाजै ॥ वारी. ॥ आये। धाये । मनहारी । सुरनारी । पदमपदमप्रति अष्टोत्तरशत, ठने सुदल ते सब कोटि सताइस मुद, जुत नाचत नवरसगान ठान काननको उपजावत सुख वंक लै लावत लंक लचावत, दुति लखि दामनि लाजै ॥ २ ॥ वारी. ॥ भारी । गोप गोपत्तिय जाय मायडिंग करी तास श्रुति सारी । सुखनिद्रा जननी को कर नमि अंक लियो जगतारी। लै वसु मंगलद्रव्य दिशसुरी चली अग्र शुभकारी । हरखि हरी, चख सहस करी तब, जिन वर निरखनकाजै ॥ ३ ॥ वारी. ॥ इन्द्रने, श्रीजिनेन्द्र पधराये । ता गजेन्द्रपै प्रथम द्वितीय छत्र दिय तृतिय, तुरिय- हरि, मुद धरि चमर दुराये । शेषशक्र जयशब्द करत नभ, लंघ सुराचल छाये । पांडुशिला जिन थाप नची सचि दुन्दभिकोटिक बाजै ॥ ४ ॥ वारी. ॥ जन्मन्हवन शुभ ठानो । क्षीरोदधिजल आनो । परमानो । वसु योजन ढारत जयधुनि गाजै ॥ ५ ॥ वारी ॥ दौलत भजन सौरभ पुनि सुरेशने श्रीजिनेशको, हेमकुम्भ सुरहाथहि हाथन, वदनउदरअवगाह एक चौ, सहसआठकर करि हरि जिनसिर ८४
SR No.090128
Book TitleDaulat Bhajan Saurabh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTarachandra Jain
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year
Total Pages208
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Devotion, & Worship
File Size3 MB
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