SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 231
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २१४ दशाश्रुतस्कन्धनियुक्ति : एक अध्ययन सर्वार्थसिद्धि, पूज्यपाद :: सं०पं०फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री, बानपीठ मूर्ति देवी जैन ग्र०मा० (संस्कृ० १३), भारतीय ज्ञानपीठ, काशी १९५५। संस्कृत इंग्लिश डिक्शनरी : एम० विलियम्स, आक्सफोर्ड. १८९९/ संस्कृत-हिन्दी-कोश : वी०एस० आप्टे, नाग प्रकाशक, जवाहर नगर, दिल्ली पाँचवाँ पुनर्मु० सं० १९९५/ हिस्ट्री ऑव इण्डियन लिटरेचर : खण्ड दो, कलकत्ता, १९३३। श्रीणि छेदसूत्राणि :: सं० मधुकरमुनि, जिनागम ग्र० मा० ३२, आगम प्रकाशन समिति, ब्यावर, १९९२। शोध-जर्नल व पत्रिकायें: अमरभारती : मासिक, वीरायतन, राजगिर। इण्डियन हिस्टारिकल क्वार्टली : सं० एन०एन०ला, रामानन्द विद्याभवन, कालिकाजी, नई दिल्ली पुर्नमुद्रण सं० १९८५) जर्नल ऑव द ओरियण्टल इन्स्टीच्यूट : ओरियण्टल इन्स्टीच्यूट ऑव बड़ौदा, खण्ड २२, जून १९७३। जिनवाणी : मासिक, सम्यक्ज्ञान प्रचारक मण्डल, जयपुर। श्रमण : त्रैमासिक, पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी।
SR No.090127
Book TitleAgam 37 Chhed 04 Dashashrutskandh Sutra Ek Adhyayan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAshok Kumar Singh
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1998
Total Pages232
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Philosophy, & agam_related_other_literature
File Size13 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy