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________________ दशाश्रुतस्कन्धनियुक्ति : एक अध्ययन नियुक्ति की एक व्युत्पत्ति शाण्टियर ने भी सुझायी है उनके अनुसार वर्तमान नियुक्ति साहित्य आगमों की प्रथम व्याख्या नहीं है, बल्कि गद्य में प्रणीत विशालकाय आगमिक व्याख्याओं से गाथा अंश के रूप में उद्धृत है। उनकी विषय-वस्तु को संक्षिप्त करते हुए तथा उन गद्य-निबद्ध आगमिक व्याख्याओं के आधार पर ग्रन्थों का वाचन कराने वाले उपाध्यायों की स्मृति में सहायक थे। इस के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मौलिक वृत्तियों से नियुहित होने के कारण इन्हें निज्जुत्ति कहा जा सकता है। परन्तु यह व्याख्या भी सन्तोषजनक नहीं है क्योंकि उक्त गद्यात्मक व्याख्या ग्रन्थों का अस्तित्व प्रमाणित नहीं किया जा सकता। (ई.हि.क्वार्टरली, खण्ड ११, पृ. ६२८) इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि नियुक्ति शब्द की सर्वसम्मत व्याख्या अभी तक प्रस्तुत नहीं की जा सकी है। परन्तु इतना निश्चित है कि नियुक्ति विशुद्ध रूप से जैनों की अपनी विशिष्टता रही है और व्याख्या पद्धति के क्षेत्र में जैनों का विशिष्ट अवदान है। एल०अल्सडोर्फ का अभिमत अत्यन्त प्रासङ्गिक है- no doubt the exclusive invention of the Jaina scholars and their most original contribution to scholastic research" (Aspects of Jainology 3, p. 28).. __जहाँ तक नियुक्ति के अवयवों या घटकों का प्रश्न है इसका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अवयव निक्षेप रहा है। निक्षेप सिद्धान्त के द्वारा विवेच्य शब्दों का अर्थ निर्धारण इसका मुख्य प्रयोजन रहा है। स्वयं नियुक्तिकार ने इस प्रयोजन को स्पष्ट उल्लिखित किया है- एक शब्द के कई अर्थ होते हैं, उनमें से कौन सा अर्थ किस प्रसङ्ग में उपयुक्त है। भगवान् महावीर के उपदेशकाल में किस शब्द से कौन सा अर्थ सम्बद्ध रहा है, आदि बातों को दृष्टि में रखकर, सम्यक् अर्थ-निर्णय तथा मूलसूत्र के शब्दों के साथ सम्बद्ध स्थापित करना नियुक्ति का उद्देश्य है। (आ०नि०, ८८) ___ मूल ग्रन्थ के शीर्षक, इसके अध्ययनों के शीर्षक तथा कुछ अन्य विशिष्ट शब्दों की निक्षेप पद्धति द्वारा व्याख्या की गई है। नियुक्ति में विवेचन के इस स्वरूप को अल्सडोर्फ ने इस प्रकार अभिव्यक्त किया है- Niksepa is applied first to the title of the canonical work to be explained, if this title is a compound one, to each of its constitutents, subsequently to the titles of each chapter and sub sections, lastly, perhaps to a few key words of the sutra text : (Journal, Baroda, XXII, 1973.) नियुक्तियों में निक्षेप के अलावा कुछ विशिष्ट शब्दों का एकार्थ तथा निरुक्तव्युत्पत्तिपरक अर्थ भी बताया गया है। नियुक्ति में दृष्टान्त कथाओं की सूची भी दी
SR No.090127
Book TitleAgam 37 Chhed 04 Dashashrutskandh Sutra Ek Adhyayan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAshok Kumar Singh
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1998
Total Pages232
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Philosophy, & agam_related_other_literature
File Size13 MB
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