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________________ शाप्ता के विचार ] [ १२५ (६२) अस्तिजीव :- प्रात्मा अनुभवसिद्ध है । चेतना में चित्त लीन करें । जीव अस्तिरूप है, केवलज्ञान से प्रत्यक्ष है। (६३) नित्य :- जीव द्रव्याथिकनय से नित्य है । (६४) कर्ता :- मिथ्यादृष्टि जीव पुण्य-पाप का कर्ता है। (६५) भोक्ता :- मिथ्यादृष्टि जीव पुण्य-पाप का भोक्ता भी है। निश्चयनय से जोब न तो कर्ता है और न भोक्ता । (६६) अस्तिध्रव :- निर्वाण का स्वरूप अस्तिध्र व है, व्यक्त निर्वाण वह अक्षय मुक्ति है । (६७) उपाय :- दर्शन, ज्ञान और चारित्र मोक्ष के उपाय है। ये सड़सठ भेद (४+३+१०+३+५+८+६+५+५+ ६+६+६=६७) सम्यक्त्व के अर्थात् परमात्मा की प्राप्ति के उपाय हैं। ज्ञाता के विचार ज्ञाता इसप्रकार विचार करता है : उपयोग जब ज्ञेय का अवलंबन करता है, तब ज्ञेय अवलम्बी होता है, अतः ज्ञेय का अवलम्बन लेनेवाली शक्ति
SR No.090125
Book TitleChidvilas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipchand Shah Kasliwal
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages160
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Spiritual
File Size2 MB
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