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________________ २१८] परवानुमोप बम को चिकित्सा करवाने के प्रायश्चित्त सूत्र पूर्ण ३०१-३०३ (३) अन्यतीथिक या गृहस्थ द्वारा चिकित्सा करवाने के प्रायश्चित्त वण तिगिमछाकाराषणस्स पायपिछत्तसुत्ताई-- व्रण की चिकित्सा करवाने के प्रायश्चित्स सूत्र-- ३८२. जे भिक्बू अण्णस्थिएण वा, मारस्थिएण वा, अपणो कार्यसि ३८२. जो भिक्षु अन्यतीधिक से या गृहस्थ से अपने शरीर के वर्ग पण काआमज्जावेज्जा , पमरजावेज्ज वा, मार्जन करवावे, प्रमार्जन करावे, मामज्जातं वा, पमजावेतं वा सलज्जा। मार्जन करबाने वाले का, प्रमार्जन करवाने वाले का अनु मोदन करे। बे मिक्यू अण्णउत्पिएप वा, गारथिएषा, अप्पणो कार्यसि जो भिक्षु अन्यतीथिक से या गृहस्थ से अपने शरीर के व्रण वणं--- कासंबाहावेज्न वा, पलिमहावेज वा, मर्दन करवावे, प्रमर्दन करबाचे, संबाहात पा, पलिमहावेत वा साहजाद । मन रमवा पक, प्रधान करवाने वाले का अनुमोदन करे। जे मिक्ल मजास्पिएणमा, गारस्थिएणवा, अप्पणो कार्यसि जो भिक्षु अन्यतीर्थिक से मा गृहस्थ से अपने शरीर के अण वर्ण पर.. तेल्लेक वा-जाव-मवगीएणपा, सेल-यावत्-मक्खन, मसावेज्ज वा, मिलिंगावेजपा, मलवावे. बार-यार मलवावे, मक्खावतं दा, मिलिंगायतं वा साइजाइ । मलवाने वाले का, बार-बार मलवाने वाले का अनुमोदन करे। मे भिगख अथिएगवा, गारस्थिएण वा, अप्पणी कायंसि जो भिक्षु अन्यतीथिक से या गृहस्थ से अपने शरीर के व्रण वर्ष सोडेग वा-गाव-वाणेक था, उस्लोलावेज्नवा, उम्बट्टावेज वा, उस्लोलावेतंबा, उबट्टायत, वा साइजह । मिक्बू अण्णउरिषएगवा, गारस्थिएणवा, अपणो कार्यसि बर्म--- सीमोरग-वियडेण वा, उसिगोववियोग वा, उन्छोलावेल वा, पधोयाषेज्ज वा, उच्छोलायत बा, पधोयावेत वा साइज्जा। लोध यावत्-वर्ण का उबटन करवाये, बार-बार उबटन करवाबे, उबटन करवाने वाले का, बार-बार उबटन करवाने वाले का अनुमोदन करे। जो भिक्षु अन्यतीथिक से या गृहस्थ से अपने शरीर से अण को अचित्त शीत जल से या अपित्त उष्ण जल से, धुलवाये, बार-बार धुलवाये, धुलवाने बाले का, बार-बार धुलवाने वाले का अनुमोदन जो भिक्षु अन्यतीधिक से या गृहस्थ से अपने शरीर के व्रण को में भिक्टू अण्णसथिएण पा, गारस्थिरणमा, अपणो कार्यसि रणंफूमावेल ना, त्यावेज वा, फूमावेश वा, रयात वा साइण्मद । रंगवावे, बार-बार रंगवावे, रंगवाने वाले का, बार-बार रंगवाने वाले का अनुमोदन करे। उसे चातुर्मासिक उपातिक परिहारस्थान (प्रायश्चित्त) आता है। सेरमाणे भावजा नाउम्मासियं परिहारदाणं उन्धाइयं -नि. उ. १५, सु. २५-३०
SR No.090119
Book TitleCharananuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year
Total Pages782
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Conduct, Agam, Canon, H000, H010, & agam_related_other_literature
File Size23 MB
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