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________________ ॐ हीं मनसा कृतदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। १।। ॐ हीं मनसा कारितदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। २।। ॐ हीं मनसानुमोदितदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ३।। ॐ हीं वचसा कृतदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ४।। ॐ हीं वचसा कारितदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ५।। ॐ हीं वचसानुमोदितदेवस्त्रीरपर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।।६।। ॐ ह्रीं वपुषा कृतदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ७।। ॐ हीं वपुषा कारितदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ८।। ॐ हीं वपुषानुमोदितदेवस्त्रीस्पर्शनेंद्रियविषयाब्रह्मविरति महाव्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ६।। इति ब्रह्मव्रतस्य षष्ठः प्रकार: ३६ 59
SR No.090118
Book TitleCharitra Shuddhi Vrat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmchand Shastri
PublisherJain Mahila Samaj Delhi
Publication Year
Total Pages161
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Principle, & Ethics
File Size2 MB
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