SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 112
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 10 गुणस्थान भाव म्युच्छिति भाव अभाव 2 (मिथ्यात्व, 31 (कुज्ञान3, दर्शन 2,| 10(ज्ञान, अभव्यत्व) शायो. लब्धि 5, गति | अवधिदर्शन, 3. कषाय 4, पुरुषवेद, सम्यक्त्व, देशर्सयम, मिथ्यात्व, अज्ञान, असंयम, असिद्धत्व, सराग चारित्र) लेश्या 6, भव्यत्व, अभव्यत्व, जीयत्व) 2 (कुशान 3) 29 (उपर्युक्त 31 में से 12 (उपर्युक्त 10 में | निगाच, अभव्यत्व, जोड़ना) 30 (उपर्युक्त 29 में से | (पूर्वोक्त 12 में से । कुज्ञान कम कर । मिश्र मिश्र ज्ञान, अवधिदर्शन ज्ञान , तया कम करके 3 कुशान अवधिदर्शन जोड़ना) | |जोड़ना) 153 अशुभ 33 (पूर्वोक्त 30 +3 | (कुजाना, मिथ्यात्व, नेश्या, सम्यक्त्व + 3झान -3|अभव्यत्व, सरागसंयम, असंयम, मिश्रज्ञान) | संयमासयम, मनः देवगति) पर्ययज्ञान) 29 (पूर्वोक्त " -३ | 12 (पूर्वोक्त : - (संयमासयम, अशुभ लेश्या, वेशसंयम + 3 अशुभ तिर्यंचगति) असंयम, देवगति + लेश्या, असंयम, देशसयम) | देवगति) lo 29 (पूर्वोक्त 29 - 12 पूर्वोक्त 12 - तियंचगति, देशसंयम मनःपर्यय, सराम चारित्र + मनःपर्ययज्ञान, + तिर्यंचगति, सराग चारित्र) देशसंथम) | 12 (पूर्वोक्त) (पीत, पदम /29 (पूर्वोक्त) लेश्या, वेवक सम्यक्त्व) (105)
SR No.090106
Book TitleBhav Tribhangi
Original Sutra AuthorShrutmuni
AuthorVinod Jain, Anil Jain
PublisherGangwal Dharmik Trust Raipur
Publication Year
Total Pages151
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Principle
File Size2 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy