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________________ देवकुरुव उत्तर कुरु मोर :- १. वि जरा हृद..... भोलानंद -23 7988⋅ नील पर्वत जम्बू वृक्ष स्थल गंधमादन -0 47>-| OR: उत्तर कुरु ४ गुहार प्रवेष के बनों पादर्य भागों में मान्यज्ञान वैर्यदल, सौमनस रजलवत् श्वेत विद्युतप्रभतीयवत् रक्तादन व बनबेरी म अस्थान कप अन्तर स्कूटी प्रमाणान्तर- (०५४) । गाओं५ कुल २०० क १०) है प्रत्येव बाजू के 20 वाचन शैल प्रत्येक ग्रह - तर सागर रजत पूर्ण सोता रह प्रत्येक अन्तर २० वांगे १०००० ५५२० १० नन्द www Pet nän करा देश स्फटिक त्रिलोक चड़ामणि नामका चैत्यालय 3020 132 लोहित गंधत्या उत्तर गजामानिगी PRATEE ३३६८४ है १०७ ०३१०) देश मलावती पद्मा देश मंगल विभल ३०२०८६ उ जव कावन / विशिष्ट 17452 ÄÄÄÄÄ AP nin * O *** पश्चिम वनवेदी 2 *~ 2010 F तोरात स्वस्तिक तपन Reapest बनवेद‍ देवकुरु O यमक (चित्रकूट) (विचित्रकूट) ममक 0 ान दक्षिण आग्नेय "लिशियद सीता नदी
SR No.090094
Book TitleBhagavana Mahavira aur unka Tattvadarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDeshbhushan Aacharya
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1014
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, Principle, & Sermon
File Size36 MB
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