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________________ ५७७ विंशतितमोऽध्यायः का परिवेष धारण कर ले तो ( तदा) तब (राहु) राहु ( सर्वग्रासं कृत्वा) सर्वग्रास करके चन्द्रमा को (तञ्चविमुञ्चति ) छोड़ देता है। भावार्थ — अष्टमी का चन्द्रमा लाल प्रभा का परिवेष धारण करे तो राहु चन्द्रमा को सर्वग्रास करके छोड़ता है ॥ ३१ ॥ कृष्णपीता यदा कोटिर्दक्षिणाः स्याद्ग्रहः सितः । पीतो यदाऽष्टम्यां कोटी तदा श्वेतं ग्रहं वदेत् ॥ ३२ ॥ ( यदाऽष्टम्यां ) जब अष्टमी के चन्द्रमा का श्रृंग (कृष्णपीताकोटि :) काला-पीला हो (दक्षिणा: स्याद्ग्रहः सित) तो दक्षिण में ग्रहण ' भी श्वेत होता है ( पीतो) पीला हो तो ( तदा) तब ( श्वेतं ग्रहं वदेत्) श्वत ग्रहण होगा । भावार्थ — जब अष्टमी का चन्द्रमा के दक्षिण श्रृंग काला पीला हो तो समझों ग्रहण भी श्वेत होगा और पीला हो तो श्वेत होगा ॥ ३२ ॥ दक्षिनामेवामा कपोत मेचकाभा तु यदि चन्द्रमा की ( दक्षिणा मेचकाभा) दक्षिण शिखा मेचक वर्ण की हो (तु) तो ( कपोत ग्रहमादिशेत्) कपोत वर्ण का ग्रह दिखेगा, ( कपोत मेचकाभा कोटी) कपोत मेचक आभा का श्रृंग हो (तु) तो ( ग्रहमुपानयेत् ) ग्रहण का भी वैसा ही रंग होता है। શું कपोत कोटी ग्रहमादिशेत् । ग्रहमुपानयेत् ॥ ३३ ॥ भावार्थ — जब चन्द्रमा की दक्षिण शृंग मेचक आभा वाली हो तो ग्रहण का वर्ण कपोत वर्ण दिखेगा और कपोतमेचक आभा हो तो उसी वर्ण का ग्रह होगा ॥ ३३ ॥ पीतोत्तरा यदा कोटिदक्षिणाः रुधिर प्रभः । कपोतग्रहणं विन्धाद् पूर्व पश्चात् सितप्रभम् ॥ ३४ ॥ जब चन्द्रमा (दक्षिणाकोटि :) दक्षिण श्रृंग ( रुधिरप्रभः) लाल प्रभावाला हो तो ( कपोतग्रहणं ) ग्रहण भी कपोत रंग का होगा, ( पीतोत्तराकोटि) उत्तर की श्रृंग पीली हो तो वैसा रंग होगा, (पूर्व पश्चात् सितप्रभः) पहले और पीछे श्वेत प्रभा होगी ।
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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