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________________ १११ पंचमोऽध्यायः भी इन्हीं महीनोंमें बीमारियाँ फैलती हैं। भूकम्प होनेकी सूचना भी उक्त प्रकारकी बिजलीसे ही अवगत करनी चाहिए। चैत्री पूर्णिमाको अचानक आकाशमें बादल छा जायें और पूर्व - पश्चिम बिजली कड़के तो आगामी वर्ष उत्तम रहता है और वर्षा भी अच्छी होती है। फसलके लिए यह निमित्त बहुत अच्छा है। इस प्रकार के निमित्त से सभी वस्तुओंकी सस्ताई प्रकट होती है। वैशाखी पूर्णिमाको दिनमें तेज धूप हो और रात में बिजली चमके तो आगामी वर्षभं वषां अच्छी होती है। ग्रीष्म ऋतु — ज्येष्ठ और आषाढ़ में साधारणतः बिजली चमके तो वर्षा नहीं होती । ज्येष्ठ मासमें बिजली चमकनेका फल केवल तीन दिन घटित होता है, अवशेष दिनोंमें कुछ भी फल नहीं मिलता। ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा, ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या और पूर्णिमा इन तीन दिनोंमें बिजली चमकनेका विशेष फल प्राप्त होता है। यदि प्रतिपदाको मध्यरात्रिके उपरान्त निरभ्र आकाशमें दक्षिण-उत्तरकी ओर गमन करती हुई बिजली दिखलाई पड़े तो आगामी वर्षके लिए अनिष्टकारक फल होता है। पूर्व-पश्चिम सन्ध्याकालके दो घण्टे बाद तड़-तड़ करती हुई बिजली इसी दिन दिखलाई पड़े तो घोर दुर्भिक्ष और शब्दरहित बिजली दिखलाई पड़े तो समयानुकूल वर्षा होती है। अमावस्या के दिन बूँदा- बूँदीके साथ बिजली चमके तो जङ्गली जानवरोंको कष्ट, धातुओं की उत्पत्तिमें कमी और नागरिकोंमें परस्पर कलह होती है। ज्येष्ठ पूर्णिमाको आकाशमें बिजली तड़-तड् शब्दके साथ चमके तो आगामी वर्षके लिए शुभ समयानुकूल वर्षा और धन-धान्यकी उत्पत्ति प्रचुर परिमाणमें होती है। वर्षाऋतु — श्रावण और भाद्रपदमें ताम्रवमर्णकी बिजली चमके तो वर्षाका अवरोध होता है। श्रावण मासमें कृष्ण द्वितीया, प्रतिपदा, सप्तमी, एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, शुक्ला प्रतिपदा, पञ्चमी, अष्टमी, द्वादशी और पूर्णिमा तिथियाँ विद्युत् निमित्तको अवगत करने के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण हैं, अवशेष तिथियोंमें रक्त और श्वेत वर्णकी बिजली चमकनेसे वर्षा और अन्य वर्णकी बिजली चमकनेसे वर्षाका अभाव होता है। कृष्ण प्रतिपदाको रात्रिमें लगातार दो घण्टे तक बिजली चमके तो श्रावणके महीने में वर्षाकी कमी ; द्वितीयाको रह-रहकर बिजली चमके और तथा गर्जन-तर्जन भी हो तो भादोंमें अल्पवर्षा और श्रावण के महीनमें साधारण वर्षा; सप्तमीको पीले रंग की बिजली चमके तथा आकाशमें बादल चित्र-विचित्र रंगके एकत्रित हों तो सामान्यतया वर्षा होती है। एकादशीको निरभ्र आकाशमें बिजली चमके तो -
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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