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________________ भद्रबाहु संहिता ९१० उन्हें पैर व अंगों की आकस्मिक चोटें लगती रहती हैं। जब जल यात्रा करते हो तो अधिक सावधान रहना चाहिए। वे डूबने का अनुभव न रखने के कारण बहुत कम जीवन में पार उतरते हैं। मंगल का उभार और उसके अर्थ अंगूठे के नीचे की जगह तथा रेखा के अन्दर इसका स्थान हैं जब यह बहुत अच्छी प्रकार से हो और अधिक बड़ा न हो तो प्रेम हाजिता की इच्छा हर एक नशा से सौन्दर्य की पूजा, दूसरों को प्रसन्न रखने की इच्छा, कलापूर्ण तथा तरंगित स्वभाव प्रदर्शित करता हैं, और यह प्राय: कलाकारों तथा गवैया के हार्थों में पाया जाता हैं। जीवतत्त्व विज्ञान बतलाता हैं कि यह उभार हथेली में खून का बड़ा बर्तन ढ़कता हैं। (Great Palmer Arch) यदि यह वृत्त का टुकड़ा बड़ा होता हैं तो पर्याप्त खून का होना प्रकट करता हैं। फलस्वरूप स्वास्थ्य अच्छा रहता हैं इसलिए यह पाया जाता हैं, कि इस उभार को अधिक उभरा हुआ तथा बड़ा रखने वाले मनुष्य तन्दुरूस्ती में अच्छे होते हैं तथा कम खून वालों की अपेक्षा इच्छायें अधिक रखते हैं। इस वास्ते जब यह बड़ा हो तो बड़ी उमंगे तथा इच्छायें प्रकट करने वाला समझा जाता हैं। वनिस्पत एक चपटे या अवनत उभार के इसलिए जब यह उभार ऊँचा तथा बड़ा होता हैं तो (Positive) तथा चपटा और छोटा होता है तो (Negative) कहलाता हैं। यदि यह उभार अच्छा हैं और बाकी हाथ साधारण है, तो जैसा कि यह एक जाति (Sex) का दूसरे (Sex) की ओर आकर्षित होना बतलाता हैं। इसका होना एक बहुत ही अच्छा चिह्न हैं, किन्तु यदि यह हाथ में और बुरे चिह्नों के साथ में पाया जाता हैं तो वे बुरी प्रवृत्तियाँ बढ़ जाती हैं। जबकि जन्म तिथि के साथ में विचारा जाये तो यह और स्वभावों पर, जो कि वैसे ही चले जाते हैं सन्तोषजनक प्रभाव डालता हैं। विद्यार्थी इसको 20 अप्रेल से 20 मई तक तथा 26 मई तक (Positive) सोच सकता हैं और मनुष्यों में निम्नलिखित स्वभाव पाये जाते हैं। दूसरों पर अधिकार तथा हुक्म करने की बहुत इच्छा अपने विचारों में कट्टर
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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