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________________ 454 भद्रबाहुसंहिता लेने का संकेत होता है । खिलाड़ियों का आपस में मल्ल युद्ध करते हुए देखना बड़े भारी रोग का सूचक है । गाय-यदि स्वप्न में कोई गाय दुहने की इन्तजारी में बैठी हुई दिखाई पड़े तो सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। गाय का दर्शन, जी० एच० मिलर के मत से, प्रेमिका-मिलन सूचक बताया गया है । चारा खाते हुए गाय को देखने से अन्न प्राप्ति; बछड़े को पिलाते हुए देखने से पुत्रप्राप्ति, गोबर करते हुए गाय को देखने से धनप्राप्ति और पागुर करते हुए देखने से कार्य में सफलता मिलती है। घड़ी-स्वप्न में बड़ी देखने से शत्रुभय होता है । घड़ी के घण्टों की आवाज सुनने से दुःखद संवाद सुनते हैं, या किसी मित्र की मृत्यु का समाचार सुनाई पड़ता है। किसी के हाथ से घड़ी गिरते हुए देखने से मृत्युतुल्य कष्ट होता है । अपने हाथ की घड़ी का गिरना देखने से छ: महीने के भीतर मृत्यु होती है। चाय - स्वप्न में चाय का पीना देखने से शारीरिक वाष्ट; प्रेमिका वियोग एवं व्यापार में हानि होती है । मतान्तर से चाय पीना पाभकारक भी है । जन्म - यौद स्वप्न में कोई स्त्री वच्चे का जन्म देख तो उसकी किसी सखी, सहली को पुत्र प्राप्ति होती है तथा उसे उपहार मिलते हैं। यदि पुरुप यही स्वप्न देखे तो यश-प्राप्ति होती है । ___ झाड़-यदि स्वप्न में नया झाड़ दिखाई पड़े तो शोध ही भाग्योदय होता है। पुराने झाडू का दर्शन करने से सट्टे में धन-हानि होती है। यदि स्त्री इसी स्वप्न को देख तो उसे भविष्य में नाना कष्टों का सामना करना पड़ता है। ___ मत्यु-- मृत्यु देखने से किसी आत्मीय की मृत्यु होती है; किन्तु जिस व्यक्ति की मृत्यु देखी गयी है, उसका कल्याण होता है । मृत्यु का दृश्य देयना, गरत हु। व्यक्ति की छटपटाहट देखना अशुभसूचक है। किमी सबारी से नीचे उतरत ही मत्य देखना राजनीति में पराजय का सूचक है। सवारीक ऊपर चढकर ऊंचा उटना तथा किसी पहाड़ पर ऊँचा चढ़ना शुभफल सूचक होता है। पुद्ध-स्वप्न में युद्ध का दृश्य देखना, युद्ध में भयभीत होना, मारकाट में भाग लेना तथा अपने का युद्ध में मत देखया जीवन में पराजय का सूचक है ! इस प्रकार का स्वप्न देखन से सभी क्षेत्रों में असफलता मिलती है । जो व्यक्ति युद्ध में अपनी मृत्यु देखता है, उसे कष्ट सहन करने पड़ते है तथा वह प्रेम में असफल होता है । जिसस वह प्रेम करता है, उसकी और से ठुकराया जाता है। शुद्ध में विजय देखना सफल प्रेम का सूचक है । जिग प्रेमिका या प्रेमी को व्यमित चाहता है वह सरलतापूर्वक प्राप्त हो जाता है । नहोकर युद्ध करत हा न ग नव में सफलता मिलती है तथा जनर याना पर मजिन :रने का ii मिलता है । यदि ना व्याक्त किसी सवारी पर कहोकर रणभूमि म जाता
SR No.090073
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 1
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages607
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size13 MB
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