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________________ टियानुक्रमणिका प्रस्तावना प्राचीन प्रतियोंका परिचय ग्रन्थका स्वरूप व ग्रन्थकार ग्रन्थका रचनाकाल संस्कृत टीकाका स्वरूप . टीकाकार प्रभाचन्द्रका परिचय अन्य टीकायें विषयपरिचय आत्मानुशासनमें विशेष उदाहरण आत्मानुशासनपर पूर्ववर्ती भारतीय साहित्यका प्रभाव ( १ ) कुन्दकुन्द साहित्यका प्रभाव ( २ ) आत्मानुशासन और भगवती आराधना ( ३ ) आत्मानुशासन और समन्तभद्रसाहित्य ( ४ ) आत्मानुशासन और पूज्यपादसाहित्य ( ५ ) आत्मानुशासन पर श्वे. आगमोंका प्रभाव (६) आत्मानुशासन और सुभाषित-त्रिशती (७ ) आत्मानुशासन और आयुर्वेद आत्मानुशासनमें काव्यगुण २. मूल ग्रन्थकी विषय सूची ३. मूल ग्रन्थ, संस्कृत टीका और हिन्दी अनुवाद परिशिष्ट १. टीकान्तर्गत ग्रन्थान्तरोंके अवतरण २. टीकाकारके समक्ष विद्यमान ग्रन्थगत पाठभेद १३-१०० १३-१४ १४-१७ १७-१९ १९-२२ २३-३१ ३१-३३ ३४-६८ ६९-७२ ७२-९६ ७३-७६ ७६-७८ ७८-८२ ८२-८६ ८६-८८ ८८-९२ ९२-९६ ९६-१०० १०१-११२ १-२४६ २४७-२५७ २४७ २४८
SR No.090070
Book TitleAtmanushasanam
Original Sutra AuthorGunbhadrasuri
AuthorA N Upadhye, Hiralal Jain, Balchandra Shastri
PublisherBharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad
Publication Year2004
Total Pages366
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Spiritual, Sermon, & Religion
File Size28 MB
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