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________________ परिशिष्ट उपाधियाँ गङ्गरसिंग गङ्गरोगण्ड गङ्गवञ गङ्गविद्याधर गडेगलाभरण गण्ड मार्तण्ड गण्डराभरण गिरिदुर्गमल्ल गुत्तियगङ्ग चगभक्षण चक्रवर्ती चतुस्समयसमुद्धरण चलदग्गलि चलदङ्कार चलदङ्कराव चलदुत्तरङ्ग चालुक्याभरण जगदेकवीर देश कुलकण द्रोहघरट्ट नुडिदन्ते गण्ड नोलम्बकुलान्तक पट्टणामि प्रचण्डदण्डनायक प्रताप - चक्रवति बडवरबण्ट बिरुदरुवारि मुखतिलक बीररबीर भव्यचूडामणि भोषेगे तप्पुव रायरगण्ड भुजबलवीर गङ्ग मण्डलिक- विनेभ महाप्रचण्ड - दण्डनायक लेख क्रमांक 64 64 64, 171 64 163 64 176 444 64 308 176 163 163 518 64 532, 568 64, 388 421 82, 136, 342, 355, 532, 538, 547 64, 136 48, 64 457, 547, 557 175, 176 342, 348, 455, 457 234, 257 82, 135, 136, 156, 176, 547 163 481 475 481, 518, 565, 571 64 135, 136, 156, 174, 504, 532 147
SR No.090050
Book TitleAntardvando ke par
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLakshmichandra Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1993
Total Pages188
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Sermon
File Size37 MB
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